बटेश्वर। तीर्थ नगरी बटेश्वर में रविवार को भक्तिरस की गंगा बही। मुख्य ब्रह्मलाल मंदिर परिसर स्थित यात्री विश्राम गृह में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का श्रवण करने पहुंचे। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की कथा के दाैरान पंडाल में जय श्रीकृष्णा के जयकारे गूंजे।


कथा व्यास आचार्य मुकुंद उपाध्याय ने ध्रुव चरित्र की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कैसे छोटी सी उम्र में सौतेली मां सुरुचि के दुर्व्यवहार से आहत होकर ध्रुव जी ने कठोर तपस्या का मार्ग चुना और भगवान विष्णु को प्रसन्न कर अचल पद प्राप्त किया। आचार्य ने कहा अटूट विश्वास, सच्ची भक्ति और माता सुनीति के दिए गए संस्कारों से ही ध्रुव जी को वह महान पदवी मिली। इस मार्मिक प्रसंग को सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने भक्ति मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। आचार्य मुकुंद उपाध्याय के धार्मिक भजनों और संगीतमय प्रस्तुतियों पर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे। महिला और पुरुष भक्तों ने नृत्य कर जय श्री कृष्ण और राधे-राधे के जयकारे लगाए। कथा के विश्राम चरण पर भव्य महाआरती की गई। भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया। कथा आयोजक समिति ने श्रद्धालुओं से कथा श्रवण की अपील की है।



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