Retailers not at fault for sealed products; action should be taken against the manufacturer.

कलेक्ट्रेट में खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग और नियमों को लेकर एसडीएम नीलम तिवारी को ज्ञापन देते व
– फोटो : samvad

आगरा। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत व्यापारियों और निर्माताओं की दिक्कतों पर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल (उत्तर प्रदेश) ने बुधवार को जिलाधिकारी के माध्यम से एफएसएसएआई, नई दिल्ली के सीईओ को ज्ञापन भेजा। व्यापारियों ने सीलबंद उत्पादों में कमी मिलने पर रिटेलर के बजाय निर्माता कंपनी को दोषी मानने और 14 दिन के भीतर सैंपल जांच रिपोर्ट अनिवार्य रूप से देने की मांग उठाई।


महानगर अध्यक्ष नरेश पांडेय ने कहा कि सैंपल भरते समय यदि निर्माता को पार्टी बनाया जाता है तो उसे पंजीकृत डाक से फॉर्म-5क तुरंत भेजा जाए। बिल प्रस्तुत करने पर ही निर्माता को पार्टी बनाया जाए ताकि नकली सामान के खेल पर रोक लग सके। कोषाध्यक्ष सुरेश लवानिया ने मांग की है कि केंद्रीय जन विश्लेषण प्रयोगशाला की अंतिम रिपोर्ट आए बिना खाद्य पदार्थों को नष्ट या जब्त न किया जाए।

उन्होंने कहा कि सैंपल पास होने पर व्यापारी के नुकसान की भरपाई की कोई व्यवस्था नहीं है। फर्जी शिकायतों पर सैंपलिंग बंद हो और मामूली मामलों के लिए धारा 69 के तहत शमन व्यवस्था लागू हो। प्रदेश संगठन मंत्री कपूर चंद रावत ने कहा कि निर्माता हर छह माह में एनएबीएल लैब से जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करते हैं, इसलिए सीलबंद पैकिंग पर बेवजह छापेमारी और प्राइवेट लैब की जांच के आधार पर कार्रवाई बंद होनी चाहिए। पैकिंग या लेबलिंग की कमी में थोक या फुटकर व्यापारी का कोई दखल नहीं होता इसलिए इसके लिए सिर्फ कंपनी को जिम्मेदार ठहराया जाए। इस दौरान संतोष गुप्ता, रामकुमार अग्रवाल, विराग जैन, कपिल बाजपेई, सुधीर गोयल सहित अन्य व्यापारी मौजूद रहे।



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