अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के साथ लगातार हो रही मारपीट की घटनाओं ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। तीन जूनियर डॉक्टरों के निलंबन और एफआईआर से रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के पदाधिकारियों और सदस्यों में उबाल है। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उधर, फेमा (फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन) उतर गई है।

आरडीए के अध्यक्ष डॉ. समी अहमद खान ने कहा कि अक्सर हड़ताल की आलोचना की जाती है, लेकिन यह नहीं देखा जाता कि डॉक्टरों पर हमले भी बार-बार हो रहे हैं। अस्पताल में लागू गेट पास सिस्टम पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। एक मरीज के साथ केवल दो तीमारदारों का नियम होने के बावजूद भीड़ इमरजेंसी में घुस रही है और गार्ड उन्हें रोकने में असमर्थ हैं।

आरडीए उपाध्यक्ष डॉ. अख्तर अली ने बताया कि अध्यक्ष डॉ. समी अहमद खान ने फेमा के पदाधिकारियों से बात की है, वह समर्थन देने के लिए तैयार है। डॉ. अली ने कहा कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने एएमयू के विद्यार्थियों से भी सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी सिर्फ जूनियर डॉक्टरों की नहीं, बल्कि सीएमओ (कैजुअलिटी मेडिकल ऑफिसर) की भी है, जो अपनी ड्यूटी से नदारद रहते हैं। उन्होंने बताया कि घटना से आधा घंटा पहले ही ऑन-ड्यूटी डॉक्टर ने भीड़ को हटाने की अपील की थी, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने इसे अपनी जिम्मेदारी न बताकर पल्ला झाड़ लिया।



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