झांसी। सीजीएसटी घूसकांड मामले में सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। इसमें जय अंबे प्लाईवुड के मालिक लोकेश तोलानी का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं है वहीं, डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, अधीक्षक अनिल तिवारी, अजय शर्मा, अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता, कारोबारी राजेंद्र कुमार मंगतानी एवं तेजपाल मंगतानी के नाम चार्जशीट में हैं। अब सीबीआई की विशेष कोर्ट में सुनवाई आरंभ होगी।

30 दिसंबर 2025 को सीबीआई टीम ने सीजीएसटी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, अधीक्षक अनिल तिवारी एवं अजय शर्मा को 70 लाख की घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। इस मामले में सीबीआई ने प्रभा भंडारी, अनिल तिवारी, अजय शर्मा, नरेश गुप्ता, लोकेश तोलानी, राजेंद्र कुमार मंगतानी एवं तेजपाल मंगतानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रानू चौधरी एवं निरीक्षक आशीष सिंह ने मामले की विवेचना करते कुछ दिनों पहले चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके मुताबिक 18 दिसंबर को जय अंबे प्लाईवुड और जय दुर्गा हार्डवेयर कार्यालय परिसर एवं गोदाम की तलाशी के दौरान सीजीएसटी टीम को भारी मात्रा में अघोषित माल का स्टाक एवं कर चोरी से संबंधित दस्तावेज मिले थे। इस मामले को निपटाने के लिए जय अंबे प्लाईवुड के स्वामी लोकेश तोलानी, राजू मंगतानी, तेजपाल मंगतानी ने अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता के माध्यम से घूस की पेशकश की। सीजीएसटी अफसरों ने 1.50 करोड़ की रिश्वत मांगी लेकिन, पूरा मामला 70 लाख रुपये में तय हुआ। छापा मारने पर अधीक्षक अजय शर्मा के पास से रिश्वत की रकम बरामद हुई हालांकि गिनने पर यह रकम 69.94 लाख रुपये निकली। सीबीआई ने इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करते हुए बीएनएस की विभिन्न धाराओं में केस चलाने की अनुमति मांगी है।

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लोकेश की नहीं मिली भूमिका

सीबीआई को कारोबारी लोकेश तोलानी की इस घूसकांड में कोई भूमिका नहीं मिली। सीबीआई की ओर से चार्जशीट में कहा गया कि विवेचना के दौरान लोकेश तोलानी की भूमिका घूस के संबंध में स्थापित नहीं हो सकी। लोकेश की सीबीआई को सिर्फ एक कॉल रिकॉडिंग मिली। इसमें वह सीजीएसटी अफसरों को लेकर निराशा जाहिर करता हुआ सुनाई पड़ रहा है। पर्याप्त साक्ष्य न मिलने की वजह से सीबीआई को उसका नाम बाहर करना पड़ा। इस मामले में सिर्फ लोकेश का नाम ही बाहर हो सका है।

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सीजीएसटी अफसरों के खिलाफ अहम सुराग

विवेचना के दौरान सीबीआई को सीजीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, अनिल तिवारी एवं अजय शर्मा के खिलाफ अहम साक्ष्य मिले। आरोपी अजय शर्मा के वाहन से ही घूस की रकम 69.94 लाख रुपये नकद बरामद हुए। सीबीआई के मुताबिक अजय शर्मा से हाथ से लिखी दो सीट बरामद हुईं। उसमें कोड में जो नाम लिखे गए थे, वह सीजीएसटी अफसरों के नाम थे। इसमें अफसरों में घूस की रकम के बंटवारे की बात लिखी थी। अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता ने खिलाफ लोक सेवकों एवं निजी व्यक्तियों के खिलाफ मध्यस्थता करने के संबंध में सुबूत मिले वहीं, कारोबारी राजेंद्र मंगतानी एवं तेजपाल मंगतानी ने रिश्वत की राशि अफसरों तक पहुंचाई। अजय शर्मा के ऑफिस के रिकॉर्ड अनिल तिवारी के घर से बरामद होने को भी सीबीआई की ओर से अहम सुबूत के तौर पर पेश किया गया।



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