झांसी। डीएम की ओर से शुरू की गई न्यायालय आपके द्वार मुहिम के तहत अब लोगों को मुकदमों की सुनवाई के लिए मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। मंगलवार को डीएम गौरांग राठी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अलग-अलग मामलों की सुनवाई की। इस दौरान एक वादी को यूपी गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत एक लाख रुपये के मुचलके पर पाबंद किया गया, जबकि तीन लोगों को जिला बदर करने के आदेश दिए गए।
न्याय के लिए लंबे समय तक भागदौड़ करने के बाद भी समाधान न मिलने से कई लोग परेशान हो जाते हैं। खासकर दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले लोगों को समय और धन दोनों खर्च करने पड़ते थे। एक महीने पहले शुरू की गई डीएम की इस मुहिम से ऐसे लोगों को राहत मिल रही है। इसके तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अब तक तीन बार हुई सुनवाई के दौरान 15 से अधिक मामलों का निस्तारण हो चुका है।
डीएम ने मंगलवार को भी राजस्व, स्टांप चोरी और यूपी गुंडा नियंत्रण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई की। बरुआसागर थाना क्षेत्र के गुंडा एक्ट के मामलों में सुनवाई करते हुए सुरेंद्र यादव को एक लाख रुपये के मुचलके पर पाबंद किया गया। साथ ही उसे छह माह तक प्रत्येक शनिवार थाने में हाजिरी लगाने के निर्देश दिए गए। वहीं, आकाश, अजय गुर्जर और नंदू उर्फ प्रीतम सिंह को जिला बदर करने के आदेश दिए गए।
इसके अलावा टांकोरी और लहरगिर्द के दो स्टांप संबंधी मामलों में डीएम ने लेखपाल और उप निबंधक को मौके पर भेजकर जांच कराई। टांकोरी में ग्राम सभा की जमीन पर कब्जे की पुष्टि होने पर दोबारा जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। कोर्ट रूम में एडीएम प्रशासन शिव प्रताप शुक्ला, संयुक्त निदेशक अभियोजन अजय कुमार मिश्रा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बता दें कि डीएम की इस पहल की सराहना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर झांसी आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं।
यह है प्रक्रिया
मुकदमे की सुनवाई के लिए वादी को अपना केस तहसील या न्यायालय में दर्ज कराना होता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान दोनों पक्ष अपनी बात रखते हैं। जमीन से जुड़े मामलों में डीएम संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर जांच कराते हैं। साक्ष्य और गवाही के आधार पर फैसला सुनाया जाता है।
