झांसी। नक्शा योजना के तहत नगर निगम सीमा क्षेत्र में आने वाले हर घर का डिजिटल नक्शा तैयार होगा। इसके लिए शुक्रवार से 26 टीमें डोर-टू-डोर सर्वे का काम शुरू करेगी। पहले हो चुके ड्रोन सर्वे के आधार पर जमीनी स्थिति की जांच की जाएगी।

यह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसे केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने शुरू किया है ताकि संपत्तियों का आधुनिक तकनीक से सटीक रिकॉर्ड तैयार हो सके। प्रदेश में 10 नगर निकायों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत शामिल किया गया है। इसमें झांसी और गोरखपुर नगर निगम का भी चयन किया गया है। बाकी आठ नगर पालिकाएं हैं। बताया गया सरकार की ओर से गांव में बने घरों के स्वामियों को घरौनी का वितरण किया जा रहा है। यह घर के मालिकाना हक का प्रमाणपत्र होता है। इसी तरह अब झांसी महानगर के भवनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की तैयारी है।

पिछले साल झांसी महानगर में 150 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ड्रोन सर्वे का काम पूरा हो चुका है। इससे मिले आंकड़ों के आधार पर ही जमीनी सर्वे होगा। बताया गया कि अभी सर्वे टीम घर-घर जाकर 67 वर्ग किलोमीटर में आने वाली संपत्तियों का सत्यापन करेंगे। भवन की सीमा, क्षेत्रफल से लेकर अन्य विवरण दर्ज करेंगी। सेटेलाइट तस्वीरों और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके ही डिजिटल नक्शा तैयार होगा। डिजिटल भूमि रिकॉर्ड के फायदे के बारे में भी भवन स्वामियों और रियल स्टेट कारोबारियों आदि को बताया जाएगा।

यह है योजना का उद्देश्य

– हर मकान और भूखंड का सटीक डिजिटल नक्शा तैयार करना

– ड्रोन, जीआईएस, जमीनी सर्वे के आधार पर भूमि का सही रिकॉर्ड बनाना

– संपत्ति के स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाना

– भूमि विवाद और रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों को कम करना

नक्शा योजना के तहत महानगर में 67 वर्ग किलोमीटर में शुक्रवार से भू-सर्वे शुरू होगा। ड्रोन सर्वे से मिले आंकड़ों के आधार पर ही जमीनी स्तर पर जांच की जाएगी। इसके लिए 26 टीमें गठित की गई हैं, जिसमें कानूनगो, लेखपाल और सर्वेयर शामिल हैं। – आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त।



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