इटावा। गढ़ाकासदा गांव में चार बच्चों की मौत के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू की। छह सितंबर को सैफई आयुर्विज्ञान के विशेषज्ञों के एक दल ने गांव का दौरा किया। दल ने बीमार बच्चों के परिजन से बात कर रिपोर्ट एकत्र की। दल ने गांव से 10 बीमार बच्चों के नमूने लिए थे। इन नमूनों की जांच सैफई की उच्च तकनीक वाली मशीन में की गई। जांच में एक बच्चे में डेंगू की पुष्टि हुई है। अन्य बच्चों में डेंगू जैसे ही लक्षण पाए गए हैं।
दल ने अपनी रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेज दी है। दल ने माना है कि मृत चार बच्चों में से दो की मौत डेंगू से हुई थी। स्वास्थ्य दल पहले गांव में वायरल बुखार फैलने का दावा करता रहा था। उन्होंने लगातार डेंगू फैलने से इन्कार किया था। सात सितंबर को प्रोफेसर कम्युनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ धीरज श्रीवास्तव और उनकी टीम ने गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने मृतक किशन के परिजनों से बात की और उसकी जांच रिपोर्ट देखी। दल ने साक्षी नाम की दूसरी बच्ची की रिपोर्ट भी देखी। साक्षी सैफई आयुर्विज्ञान विवि में भर्ती रही थी और उसमें डेंगू की पुष्टि हुई थी। धीरज श्रीवास्तव ने माना कि किशन और साक्षी दोनों की मौत डेंगू से हुई थी।
दल द्वारा लिए गए 10 नमूनों में से एक बच्चे में डेंगू की पुष्टि हुई। बाकी बच्चों में डेंगू संबंधित या हल्का बुखार के लक्षण मिले। इन लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, बदन दर्द, सांस लेने में दिक्कत, खून की कमी और खून आना शामिल हैं। धीरज श्रीवास्तव ने यह रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजी है। गांव में बीमारी फैलने और बच्चों की मौत के बावजूद स्वास्थ्य दल डेंगू से इन्कार करता रहा था।
