इटावा। मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के प्रति जिले के पशुपालकों में खासा उत्साह देखने को मिला है। जिले में योजना के तहत महज छह डेयरी यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य मिला है, जबकि इसके लिए 142 पशुपालकों ने आवेदन किया है। यानी लक्ष्य के मुकाबले करीब 23 गुना अधिक दावेदार सामने आए हैं। अब पशुपालन विभाग की ओर से सभी आवेदनों का सत्यापन कराया जा रहा है। पात्रता पूरी करने वाले आवेदकों में से छह लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
योजना के तहत गोपालकों को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 10-10 गायों की क्षमता वाली डेयरी यूनिट स्थापित की जानी है। इन यूनिटों में केवल उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली स्वदेशी नस्लों की गायें रखी जाएंगी। इनमें गिर, थारपारकर और साहीवाल नस्ल प्रमुख हैं। योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि पहले 31 जुलाई निर्धारित थी। पशुपालकों की मांग को देखते हुए आवेदन की तिथि बढ़ाई गई, जिससे अधिक पात्र लोग योजना में शामिल हो सकें। इसके बाद आवेदनों की संख्या बढ़कर 142 तक पहुंच गई थी।
ये है मिनी नंदनी योजना
पशुपालन विभाग के मुताबिक, एक डेयरी यूनिट की कुल लागत 23.60 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसमें सरकार की ओर से 50 प्रतिशत यानी 11.80 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। शेष 50 प्रतिशत राशि में 35 प्रतिशत बैंक ऋण और 15 प्रतिशत लाभार्थी का अंशदान शामिल होगा। हालांकि, सक्षम लाभार्थी बैंक से ऋण लेने के बजाय अपनी ओर से पूरी राशि भी निवेश कर सकता है।
वर्जन
जिले को छह डेयरी यूनिट का लक्ष्य मिला है। प्राप्त आवेदनों का सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद पात्र आवेदकों में ई-लॉटरी के माध्यम से छह लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजना के तहत डेयरी यूनिट स्थापित कराने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
डॉ. धर्मेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
