इटावा। अफसरों के आदेश के बाद भी जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ रही है। बारिश के दिनों में जिला अस्पताल में अक्सर बिजली घंटों गायब रहती है। अफसर, डॉक्टर व नर्सिंग स्टॉफ के कक्षों में इनवर्टर का बैकअप रहता है, जबकि मरीजों और तीमारदारों के लिए जनरेटर की व्यवस्था है, जो यदा-कदा ही चलता है। उमस भरी गर्मी में कुछ ही देर के लिए बिजली जाते ही लोग परेशान हो उठते हैं। मंगलवार रात बारिश के बाद जिला अस्पताल की बिजली रात आठ से 10 बजे तक गुल रही। संवाद न्यूज टीम ने अस्पताल के कई वार्ड में भर्ती मरीजों की पड़ताल की तो उमस भरी गर्मी में वे बेहाल मिले। पति बीमार पत्नी को हाथ से पंखा कर रहा था तो मां-बेटे को पेपर या दुपट्टे से हवा कर राहत देने की कोशिश कर रही थीं। वृद्ध व गंभीर महिलाओं को शौचालय तक जाने में टार्च की रोशनी का सहारा लेना पड़ रहा था।

फोटो 33: बीमार पत्नी को हाथ से पंखा करता पति। संवाद

सीन-1 रात आठ बजकर 37 मिनट

अक्सर गायब रहती बिजली, घर से लाए है हाथ पंखा

मंगलवार रात आठ बजकर 37 मिनट पर जिला अस्पताल के प्रथम तल पर बने महिला सर्किल वार्ड के कक्ष संख्या एक में छह मरीज मरीज भर्ती थे। बिजली न होने की वजह से कमरे में एक भी पंखा नहीं चल रहा था। इससे मरीज व तीमारदार उमसभरी गर्मी में परेशान थे। जसवंतनगर निवासी सुनीता का सोमवार को पत्थरी का ऑपरेशन हुआ था। उसने बताया कि अस्पताल में अक्सर बिजली गायब रहती है। इसलिए परिजन घर से हाथ पंखा ले आए है।

फोटो 34: महिला वार्ड में भर्ती मां को दुपट्टे से पंखा करती बेटी। संवाद

सीन-2 रात आठ बजकर 41 मिनट

एक घंटे से नहीं आ रही बिजली, हो रही परेशानी

महिला सर्किल वार्ड में भर्ती औरैया के थाना अजीतमल निवासी रानी देवी ने बताया कि एक दिन पहले पेट में गांठ का ऑपरेशन हुआ है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में बिजली की व्यवस्था बहुत ही खराब है। बिजली जाते ही पंखे बंद हो जाते हैं। खिड़की बंद होने से उमस व मच्छर परेशान करने लगते हैं। इससे मरीज समेत तीमारदारो को परेशानी होती है।


फोटो 35: महिला शिशु वार्ड में बीमार बेटे को पेपर से हवा करती मां। संवाद

सीन-3 रात आठ बजकर 45 मिनट

बिजली जाने पर नहीं चलता है जनरेटर

जिला अस्पताल के द्वितीय तल पर महिला शिशु वार्ड बना हुआ है। इस वार्ड में छह बच्चे बुखार व दस्त की वजह से भर्ती थे। महिला खुशबू ने बताया कि बेटे को तेज बुखार में भर्ती कराया है। बताया रात आठ बजे से बिजली नहीं आ रही है। इससे बच्चा गर्मी में परेशान है। मजबूरी में पेपर से उस पर हवा करनी पड़ रही है। अन्य परिजन बाहर चले गए। वह बेटे को छोड़कर नहीं जा सकती है। अभी तक जनरेटर नहीं चलाया गया है।


फोटो 36: बिजली जाने पर वेटिंग हॉल में समय काटते तीमारदार। संवाद

बिजली गई तो वेटिंग हॉल व गैलरी में पहुंचे तीमारदार

जिला अस्पताल में बिजली जाने पर सबसे अधिक दिक्कत मरीजों की होती है। डॉक्टर व नर्सिंग स्टॉफ में इनवर्टर से पंखे चलते रहते हैं लेकिन मरीजों के वार्ड में बैकअप की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लाइट जाने पर मरीज को मजबूरी में वार्ड में रुकना पड़ता है जबकि तीमारदार वेटिंग हॉल व गैलरी में बिजली न आने तक मोबाइल चलाकर समय काटते हैं।

फोटो 37: देवेंद्र कुमार।

एक घंटे से नहीं आ रही लाइट

एक घंटे से बिजली नहीं आ रही है। पत्नी महिला सर्जिकल वार्ड में भर्ती हैं। वार्ड के सभी पंखे बंद हैं। कमरे में इतनी घुटन है कि मरीज का मरीजों को परेशानी हो है। ऑपरेशन होने की वजह से उसे बाहर भी नहीं ले जा सकते हैं। हाथ के पंखे से हवा कर-करके थक गए हैं।

फोटो 38: राधा देवी

बार-बार जा रही बिजली, हो रही परेशानी

महिला वार्ड में भर्ती भाभी को देखने आए थे। तीन घंटे में चार बार लाइट जा सकी है। बिजली जाने के बाद कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है। सब एक-दूसरे पर बात टाल रहे हैं। गरीब आदमी इलाज कराने जिला अस्पताल आता है, लेकिन यहां मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।


वर्जन

लाइन में फाल्ट होने की वजह से आपूर्ति बाधित रही थी। कर्मचारियों को लाइट जाने पर जनरेटर चलाने के निर्देश दिए गए हैं। अगर जनरेटर नहीं चलाया गया है तो इस मामले में जिम्मेदार कर्मी से कारण पूछा जाएगा, संतोषजनक उत्तर न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

-डॉ. पारितोष शुक्ला, सीएमएस पुरुष जिला अस्पताल।



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