चकरनगर। तहसीलदार न्यायालय में मंगलवार को तहसीलदार विष्णुदत्त मिश्र और अधिवक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद अधिवक्ताओं ने तहसीलदार पर दुर्व्यवहार सहित कई आरोप लगाए। उन्होंने एसडीएम रोहित कुमार मौर्य को शिकायत पत्र सौंपा और न्यायिक कार्य के बहिष्कार की चेतावनी दी है।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसीलदार न्यायालय में वाद पत्रावलियों पर उन्हें सुने बिना आदेश पारित किए जा रहे हैं। कई पत्रावलियां मुआयना के लिए उपलब्ध नहीं कराई जातीं। कुछ मामलों का निस्तारण निर्धारित तिथि से पहले ही कर दिया जाता है। न्यायालय के आदेशों का सरकारी अभिलेखों और खतौनियों में समय से अंकन नहीं होता। इससे विसंगतियां पैदा हो रही हैं, जिसका नुकसान गरीब काश्तकारों को उठाना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं ने 28 जुलाई को अधिवक्ता उमाशंकर तिवारी और मंगलवार को अधिवक्ता अवनीश राजपूत के साथ अभद्रता का आरोप लगाया। उन्होंने तहसील कर्मचारियों पर धक्का-मुक्की कर न्यायालय से बाहर निकालने का भी आरोप लगाया। एसडीएम न्यायालय में जमानत मामलों में धन उगाही, नकल जारी न करने और फाइल मंगाने के नाम पर पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
तहसीलदार विष्णुदत्त मिश्र ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि मुकदमा में आपत्ति के लिए समय दिया जाता है। जब आपत्ति नहीं लगाई जाती, तब आदेश जारी होते हैं। पेंडिंग मामलों की शासन से समीक्षा होती है।
तहसीलदार ने आरोप लगाया कि अधिवक्ता अवनीश राजपूत ने महिला शौचालय के पास चेंबर बना लिया है। इससे महिलाओं को परेशानी और सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कुछ अधिवक्ताओं ने सीओ कार्यालय के सामने भी बिना अनुमति टीनशेड डालकर चेंबर बनाया है। एसडीएम रोहित कुमार मौर्य ने बहस की पुष्टि करते हुए धन उगाही के आरोपों को गलत बताया। प्रभारी निरीक्षक बलराम मिश्रा ने तहसील कर्मचारियों के खिलाफ धक्का-मुक्की की शिकायत की जांच की बात कही।
