इटावा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में हिंदू युवती का नाम बदलकर इलाज कराने और धर्म परिवर्तन की साजिश रचने के आरोपी को कोर्ट ने मंगलवार को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सका।
जावेद उर्फ पप्पू के खिलाफ 13 जुलाई 2023 को सुधा देवी ठाकुर ने सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उस पर धोखाधड़ी सहित उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश की धाराएं लगी थीं। तहरीर में आरोप था कि जावेद युवती राधा को डॉक्टर पीके वर्मा के अस्पताल ले गया। वहां राधा का नाम बदलकर सायरा दर्ज कराने की साजिश बताई गई थी। हिंदू संगठनों ने मामले की जानकारी मिलने पर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें अभियुक्त के साथ मारपीट और हंगामा भी हुआ। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल आठ गवाह अदालत में पेश किए। इनमें युवती राधा, उसकी मां सुधा देवी, पिता मोहर सिंह, अस्पताल कर्मचारी और डॉक्टर शामिल थे।
अदालत में सुनवाई के दौरान युवती राधा ने अभियोजन पक्ष के आरोपों का समर्थन नहीं किया। राधा ने बताया कि वह खुद अस्पताल गई थी और उसे वहां जावेद मिल गया था। उसने कहा कि अस्पताल का पर्चा उसने खुद बनवाया और अपना नाम राधा ही बताया था। राधा ने अपने पहले दिए गए बयान को दबाव में दिया गया बताया। युवती के इस बयान से अभियोजन की कहानी को बड़ा झटका लगा।
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि जावेद ने कोई फर्जी दस्तावेज तैयार नहीं किया और न ही धर्म परिवर्तन का प्रमाण मिला। केवल आरोपों के आधार पर अभियुक्त को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बचाव पक्ष ने तर्क दिया। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अदालत ने जावेद उर्फ पप्पू को दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के बाद वर्ष 2023 से चल रहे मामले का निस्तारण हो गया।
