सैफई। सपा शासनकाल के ड्रीम प्रोजेक्ट रहे तीन सौ बेड के गायनी अस्पताल के निर्माण के लिए बजट का अभाव मुसीबत बन गया है। निर्माण में देरी होने की वजह से सात साल में गायनी अस्पताल की लागत 176.77 से बढ़कर 280 करोड़ रुपये हो गई है।
2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीन सौ बेड गायनी अस्पताल को स्वीकृति देकर निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। तब इसकी लागत 176.77 करोड़ आंकी गई थी। सात सालों में चार बार में अभी तक निर्माण के लिए सिर्फ 76 करोड़ रुपये ही मिल सके हैं। ऐसे में निर्माण कार्य धीमी गति से चल पा रहा है। यही वजह है कि सात सालों में निर्माण की लागत लगभग 103.23 करोड़ रुपये बढ़ गई है। अब ऐसे में जहां पहले ही सौ करोड़ रुपये की जरूरत थी। वहीं अब करीब सौ करोड़ और चाहिए होंगे।
ऐसे में निर्माण कार्य कब तक पूरा हो पाएगा यह अब बड़ा सवाल बना हुआ है। 13 एकड़ में बनाया जा रहा यह अस्पताल बनाने के लिए निर्माण निगम की ओर से मेडिकल कॉलेज प्रशासन को रिवाइज बजट भेज दिया गया है। इसमें 203 करोड़ रुपये की जरूरत दिखाई गई है। प्रोजेक्ट मैनेजर, निर्माण निगम एके सिंह ने कहा कि अब अगर शासन द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये मिल जाते तो एक साल के अंदर काम पूर्ण हो जाता। अब इस परियोजना को सात वर्ष हो चुके हैं। ऐसे इसकी कुल लागत 280 करोड़ रुपये हो गई है। अब करीब 203 करोड़ रुपये जरूरत है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को रिवाइज बजट का पत्र भेजा गया है।
प्रदेश के दो मंत्री भी कर चुके दौरा
जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना निर्माणाधीन स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं। दोनों ही मंत्रियों ने जल्द बजट दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बजट नहीं मिल सका।
एमपी समेत कई जिलों के आते हैं मरीज
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में इटावा ही नहीं कानपुर देहात, औरैया, मैनपुरी, जालौन, फिरोजाबाद, कन्नौज, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों के मरीज इलाज कराने आते हैं। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने के बाद विवि का महत्व और बढ़ गया है। कई बार ऐसा भी हुआ। जब रास्ते में ही महिलाओं के प्रसव पीड़ा हुई तो उन्हें मेडिकल यूनिवर्सिटी लेकर आना पड़ा।
