Lakshmana slew Meghnada; the cry of 'Jai Shri Ram' echoed across the battlefield.

फोटो : 6 मैदानी रामलीला में जसवंतनगर की सड़कों पर युद्ध करते मेघनाद व कुम्भकरण। संवाद

जसवंतनगर। कस्बे में चल रही मैदानी रामलीला में सोमवार को मेघनाद वध, दुर्मुख वध, कुंभकरण वध, सुलोचना सती और नागफांस की लीलाओं का प्रदर्शन किया गया। दोपहर से ही रावण दल की सेना युद्ध के लिए कस्बे की सड़कों पर उतर आई। रामलीला मैदान से निकली सेना मुख्य बाजार, छोटा चौराहा, पंसारी बाजार, जैन बाजार होते हुए कटरा पुख्ता स्थित नरसिंह मंदिर पहुंची। यहां भगवान श्रीराम के निवास स्थान के सामने राम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध हुआ।


मेघनाद ने स्वयं को अजेय बनाने के लिए अपनी कुलदेवी निकुंभला की पूजा शुरू कर दी। इसकी जानकारी रामदल को हुई तो विभीषण के सहयोग से हनुमान, सुग्रीव, जामवंत और वानर सेना निकुंभला मंदिर पहुंच गई। वानर सेना ने मेघनाद के तांत्रिक यज्ञ को विध्वंस कर दिया। यज्ञ भंग होते ही लक्ष्मण और मेघनाद के बीच घमासान युद्ध शुरू हो गया।

मायावी योद्धा मेघनाद ने लक्ष्मण पर ब्रह्मास्त्र, भगवान शिव का पाशुपतास्त्र और नारायण चक्र जैसे दिव्य अस्त्रों का प्रयोग किया लेकिन कोई भी अस्त्र लक्ष्मण को विचलित नहीं कर सका। यह देखकर मेघनाद समझ गया कि लक्ष्मण कोई साधारण मानव नहीं, बल्कि स्वयं भगवान के अंश हैं। वीरता से युद्ध करते हुए इंद्रजीत वीरगति को प्राप्त हुआ।

इसके बाद मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के हाथों कुंभकरण का भी वध हुआ। युद्ध समाप्त होते ही चारों ओर जय श्रीराम के जयघोष गूंज उठे। रामलीला देखने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष हीरालाल गुप्ता, प्रबंधक राजीव गुप्ता बबलू, उप प्रबंधक अजेंद्र गौर, राजेंद्र गुप्ता, उमाशंकर, रामनरेश यादव, राजीव माथुर, विवेक रतन पांडे, डॉ. पुष्पेंद्र पुरवार के साथ बड़ी संख्या में कस्बे के लोग मौजूद रहे।



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