शहर से लेकर कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक ऑटो, वैन, ई-रिक्शा और अन्य निजी वाहनों में क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों को बैठाकर स्कूल लाया-ले जाया जा रहा है।



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