कोठरी की कुंडी बाहर से बंद कर पिता-पुत्र को जिंदा जलाने के मामले में अदालत ने बहनोई-साले समेत तीन अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। कोर्ट संख्या-द्वितीय के अपर सत्र न्यायाधीश पूजा विश्वकर्मा ने तीनों दोषियों को उम्रकैद और 45-45 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा के बाद पीड़ित परिवार ने संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें इंसाफ मिला लेकिन कई आरोपी अब भी छूट गए।

गाजीपुर थाना क्षेत्र के चक काजीपुर गांव निवासी सूर्यकली ने बताया कि मार्च 2011 में गांव के सुरेश विश्वकर्मा के परिवार की एक लड़की लापता हो गई थी। इस मामले में उनके परिवार के पिंटू पर शक जताया जा रहा था और लगातार पुलिस पर खोजबीन का दबाव बनाया जा रहा था। 10 मार्च 2011 की शाम करीब पांच बजे कृष्णपाल उर्फ नेता, रज्जू विश्वकर्मा, सुरेश विश्वकर्मा, हरछट्टी विश्वकर्मा, देशराज, नांद, रामराज विश्वकर्मा, होरीलाल, कालू और सुरेश विश्वकर्मा का साला राजेंद्र विश्वकर्मा निवासी तौफापुर थाना हुसैनगंज शाम करीब पांच बजे घर आए। लड़की न मिलने पर परिवार की हत्या की धमकी दी।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *