मैनपुरी। योगी सरकार सभी योजनाओं और नियमों को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ लागू करने का दावा करती है। लेकिन जिले में बैठे अधिकारी न तो नियमों को मानते हैं और न ही शासन के आदेश को। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर मिलावट रोकने में भी मनमानी की। एक भी बड़े विक्रेता से मिठाई का नमूना जांच के लिए नहीं किया गया। केवल छोटे विक्रेताओं को ही कार्रवाई के नाम पर दबाया गया।

Trending Videos

चंद बड़े मिठाई विक्रेता सालाना लाखों का कारोबार करते हैं। इनकी मिठाई की खपत भी छोटे मिठाई विक्रेताओं से कहीं अधिक है। रक्षाबंधन पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने मिठाइयों में मिलावट रोकने के लिए 14 अगस्त से अभियान चलाया था। अभियान के दौरान केवल छोटे विक्रता जो पंजीकरण श्रेणी के थे, उन्हीं से नमूने लिए गए। एक भी बड़े मिठाई विक्रेता से नमूना लेना तो दूर की बात, टीम ने उसकी चौखट पर दस्तक नहीं दी।

मतलब साफ है कि विभाग ये मानता है कि लाइसेंस धारक बड़े मिठाई विक्रेता मिलावट नहीं करते हैं। उन्हें आखिर ये अधिकार किसने दिया कि वे ये निर्णय बिना खाद्य पदार्थों या मिठाई की जांच के ही कर लें। न तो एक्ट इसकी अनुमति देता है और न ही शासन के आदेश। लेकिन जिले में तैनात खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारी अपने ही विभाग के एक्ट को नहीं मानते। अधिकारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं है। विभागीय वरिष्ठ अधिकारी तो मुख्यालय छोड़कर ही चले गए हैं, ऐसे में उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। संवाद

पूर्व के अभियानों में नहीं हुआ पक्षपात

हर साल होली, दीवाली, रक्षाबंधन, नव वर्ष, भाई दूज पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशसन द्वारा अभियान चलाया जाता रहा है। लेकिन आज तक भी ऐसा नहीं किया गया। हमेशा लाइसेंसधारक बड़े मिठाई विक्रेताओं से भी नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाते थे। ये नमूने जांच में फेल भी हुए हैं। लेकिन इसके बाद भी इस बार इनसे नमूने न लेना विभाग को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

ये होते हैं लाइसेंस धारक विक्रेता

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा किसी भी खाद्य पदार्थ का विक्रय करने या भंडारण करने के लिए विभाग से पंजीकरण या लाइसेंस लेना अनिवार्य है। पंजीकरण की श्रेणी में ऐसे विक्रेता आते हैं, जिनका सालाना कारोबार 12 लाख रुपये से कम है। वहीं लाइसेंस की श्रेणी में वे विक्रेता आते हैं, जो साल में 12 लाख से अधिक का कारोबार करते हैं।

सवाल जिनके नहीं है जवाब

– क्या बड़े मिष्ठान विक्रेता मिलावट नहीं करते

– क्या बड़े मिष्ठान विक्रेताओं से नमूने लेने का नियम नहीं है

– आखिर क्यों बड़े मिष्ठान विक्रेताओं से नमूने नहीं लिए

– पंजीकरण श्रेणी के ही विक्रेताओं से नमूने क्यों लिए

– आदेश के विरुद्ध दो दिन पहले ही अभियान क्यों बंद कर दिया गया

डीएम बोले लिया जाएगा संज्ञान

मामले में जब जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले का संज्ञान लिया जाएगा। जब विभाग ने अभियान चलाया था तो सभी से ही नमूने लिए जाने थे। अगर बड़े मिठाई विक्रेताओं को छोड़ा गया है तो अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। नियम सभी के लिए समान है, इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें