उरई। एक करोड़ रुपये की फिरौती के लिए मेडिकल स्टोर संचालक अजय कुमार के अपहरण के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पांच दोषियों को अब पुलिस पर हमले के मामले में भी दोषी पाया गया है। बुधवार को कोर्ट ने पांचों को 10-10 साल की कैद सुनाई गई है। प्रत्येक दोषी पर 26,500 रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर एक आरोपी को बरी कर दिया गया।

एट थाना क्षेत्र के चावनपुरा गांव निवासी सौरभ ने 23 जुलाई 2013 की रात पुलिस को बताया था कि उसका बड़ा भाई अजय कुमार एट स्थित मेडिकल स्टोर बंद कर बाइक से घर लौट रहा था। देर रात तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। रास्ते में उसकी बाइक, चप्पल, मोबाइल और डंडा पड़ा मिला। इससे परिजनों को अपहरण की आशंका हुई। इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्जकर जांच पड़ताल शुरू कर दी।

जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि बदमाश अजय को कार से जंगल की ओर ले गए थे। बाद में बदमाशों ने अजय के पिता के दोस्त जाहर सिंह को फोन कर एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। पुलिस ने कॉल डिटेल के आधार पर बदमाशों की लोकेशन केलिया थाना क्षेत्र के सलैया जंगल में ट्रेस की।

तीन अगस्त 2013 को तत्कालीन कैलिया थाना प्रभारी प्रमोद कुमार पुलिस बल के साथ सलैया जंगल पहुंचे। पुलिस के अनुसार, घेराबंदी किए जाने पर बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई के बाद पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके कब्जे से अपहृत अजय कुमार को सकुशल बरामद किया।

पुलिस अभिलेखों के अनुसार मुठभेड़ के दौरान बाल किशुन, प्रीतम जमादार, नीरज वाल्मीकि, संदीप कुमार, प्रदीप कुमार, मुहम्मद इकबाल और उमेश कुमार मिश्रा समेत कई आरोपी पकड़े गए थे। कुछ आरोपी मौके से भाग भी गए थे।

पुलिस ने हमले के मामले में छह आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान बाल किशुन की मौत हो गई। 19 सितंबर 2025 को सभी आरोपियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से सभी जेल में ही सजा काट रहे थे जबकि मुठभेड़ के मामले में फैसला आना बाकी था।

विशेष न्यायाधीश डकैती कोर्ट चंद्रमोहन चतुर्वेदी ने बृहस्पतिवार को बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संदीप कुमार, प्रदीप कुमार, मुहम्मद इकबाल और प्रीतम जमादार व दीपक को दोषी ठहराया और 10-10 साल की सजा सुनाई। वहीं नीरज वाल्मीकि के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उसे अदालत ने बरी कर दिया। अर्थदंड जमा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

गौरतलब है कि अपहरण के पीड़ित मेडिकल स्टोर संचालक अजय कुमार की फरवरी 2024 में मौत हो चुकी है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *