मुहम्मदाबाद। डकोर थाना क्षेत्र के रमपुरा गांव में पकड़ी गई एमडी ड्रग्स फैक्टरी के पीछे कानपुर निवासी रिजवान का नाम सामने आया है। जांच में पता चला है कि रिजवान फैक्टरी में ड्रग्स तैयार करने के लिए कच्चे माल की व्यवस्था से लेकर तैयार माल को भेजने तक की जिम्मेदारी संभाल रहा था। फैक्टरी संचालक शैलेंद्र पाल घटना के बाद से फरार है।
जांच एजेंसियां अब रिजवान के मुंबई कनेक्शन की जांच कर रही हैं। उन्हें आशंका है कि रसायनों की खरीद और ड्रग्स की आपूर्ति का नेटवर्क जिले से बाहर तक फैला है। हेमंत और शैलेंद्र पाल की दोस्ती वर्ष 2016 में गांधी इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान हुई थी। जेल से छूटने के बाद हेमंत की मुलाकात शैलेंद्र से हुई। शैलेंद्र ने उसे गुलाब जल फैक्टरी का प्रस्ताव दिया था, जिसके लिए हर महीने 25 हजार रुपये देने की बात थी। इसी आड़ में फैक्टरी में ड्रग्स गतिविधियां शुरू हुईं।
सूत्रों के मुताबिक, फैक्टरी में तैयार माल को शैलेंद्र अपने गोहांड स्थित घर ले गया था। उसने संतोष को भी अपने घर बुलाया था। कानपुर निवासी रिजवान तैयार माल की व्यवस्था और उसे आगे भेजने का व्यवस्था कर रहा था। जांच एजेंसियां अब रिजवान तक कच्चे माल की आपूर्ति, रसायनों की खरीद और तैयार ड्रग्स के वितरण शहरों का पता लगा रही हैं।
हेमंत और शैलेंद्र की पुरानी दोस्ती से जुड़ी फैक्टरी की कहानी
मुहम्मदाबाद। जांच में हेमंत और फैक्टरी संचालक शैलेंद्र पाल की पुरानी दोस्ती की कहानी भी सामने आई है। बताया गया कि 2016 में गांधी इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी। तभी से दोनों एक-दूसरे को जानते थे। बाद में हेमंत जेल चला गया। वहां से छूटकर गांव पहुंचने पर उसकी मुलाकात फिर शैलेंद्र से हुई। इसी दौरान शैलेंद्र ने उसे गुलाबजल की फैक्टरी लगाने का प्रस्ताव दिया। इसके बदले हर महीने 25 हजार रुपये देने की बात कही गई थी। गुलाबजल बनाने के नाम पर शुरू किए गए इस काम की आड़ में कथित तौर पर एमडी ड्रग्स तैयार की जाने लगी। (संवाद)
गोहांड के घर तक पहुंचाया गया तैयार माल
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक फैक्टरी में तैयार माल को हेमंत अपने गोहांड स्थित घर ले गया था। इसके बाद उसने संतोष को भी अपने घर बुलाया। माल तैयार कराने और उसे आगे भेजने की व्यवस्था कानपुर निवासी रिजवान के माध्यम से की जा रही थी। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि रिजवान तक कच्चा माल कहां से पहुंचता था और वह किन लोगों के संपर्क में रहकर रसायनों की आपूर्ति करा रहा था।
शैलेंद्र की गिरफ्तारी से खुल सकते हैं कई राज
फैक्टरी संचालक शैलेंद्र पाल की गिरफ्तारी सबसे अहम मानी जा रही है। एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि फैक्टरी कितने समय से संचालित थी, कच्चे रसायनों की खरीद में किन लोगों ने मदद की और तैयार माल के खरीदार कौन थे। गौरतलब है कि 29 अक्तूबर को डीआरआई और एटीएस की संयुक्त टीम ने ऐरी रमपुरा गांव में छापा मारकर गुलाबजल बनाने की आड़ में संचालित एमडी ड्रग्स फैक्टरी का खुलासा किया था।

