फोटो – 28 जांच पड़ताल करते एसपी सुरेश चंद रावत। संवाद
शाम पांच बजे अपहरण की सूचना मिलने के बाद भी अधिवक्ता को नहीं बचा सकी पुलिस
कालपी से कानपुर के गुजैनी तक तीन जिलों की सीमा से गुजरी कार
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। कालपी बार संघ अध्यक्ष गयादीन अहिरवार के अपहरण और हत्या के मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर शिथिलता की बात सामने आ रही है। कालपी से करीब 70 किलोमीटर दूर कानपुर नगर के गुजैनी थाना क्षेत्र तक आरोपी कार से पहुंचे। इस दौरान उन्हें तीन जिलों के छह थानों की सीमा पार करनी पड़ी लेकिन किसी स्तर पर उन्हें रोका नहीं जा सका। इधर, अपहरण की सूचना मिलने के बाद पुलिस कालपी क्षेत्र में ही तलाश करती रही और आरोपी घटना को अंजाम देकर निकल गए।
अधिवक्ता के पुत्र हर्ष ने शनिवार शाम करीब पांच बजे अन्य अधिवक्ताओं को जानकारी दी थी कि उनके पिता गयादीन को कार सवार लोग अपने साथ ले गए हैं। इसके बाद अधिवक्ताओं ने कालपी कोतवाली पुलिस को तहरीर दी। मामला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष के अपहरण से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने जांच शुरू की लेकिन शुरुआती तलाश कालपी और आसपास के क्षेत्रों तक ही सीमित रही। इसी बीच आरोपी उन्हें लेकर करीब 70 किलोमीटर दूर गुजैनी थाना क्षेत्र पहुंच गए।
कालपी से गुजैनी तक के रास्ते में कालपी कोतवाली, भोगनीपुर थाना, पुखरायां क्षेत्र, अकबरपुर कोतवाली और सचेंडी थाना पड़ते हैं। इसके बाद गुजैनी थाना क्षेत्र आता है। इस तरह आरोपी तीन जिलों के छह थानों की सीमा से होकर गुजरे। सवाल यह है कि अपहरण की सूचना मिलने के बाद क्या संबंधित थानों को तत्काल अलर्ट किया गया था और संदिग्ध कार की तलाश के लिए मार्गों पर घेराबंदी की गई थी या नहीं।
रविवार सुबह गुजैनी थाना क्षेत्र में गयादीन का रक्तरंजित शव मिलने के बाद अपहरण और हत्या की पुष्टि हुई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उनकी हत्या धारदार हथियार से बेरहमी से की गई। पुलिस ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है और घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद की है। फिलहाल पुलिस हत्या की वजह, वारदात में शामिल अन्य लोगों और अपहरण के बाद आरोपियों की आवाजाही की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
अपहरण की सूचना के बावजूद आरोपी इतनी दूर तक कैसे पहुंच गए और रास्ते में पड़ने वाले थानों की पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी, यह जांच का अहम सवाल है। पुलिस की घेराबंदी और सूचना तंत्र की प्रभावशीलता भी इस मामले में जांच के दायरे में है।
पहले भी हुआ था हमला, थाने से लेकर एसपी तक लगाई थी गुहार
बेटे हर्ष ने बताया कि 13 जून 2026 को खेत से लौटते समय हांसा-बबीना मोड़ के पास आरोपियों ने पिता की बाइक रोक ली थी। उनके साथ बाइक पर साथी अखिलेश कुमार भी बैठे थे। आरोप है कि दोनों को गाली-गलौज के बाद लाठी, कुल्हाड़ी और डंडों से पीटा गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। गयादीन ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कदौरा थाने में तहरीर दी थी। सुनवाई ने होने पर तत्कालीन एसपी विनय कुमार को भी प्रार्थना पत्र दिया। कार्रवाई न होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
बिना नंबर प्लेट स्विफ्ट डिजायर कार की तलाश शुरू
अधिवक्ता के अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस ने उनके पुत्र से मिली जानकारी के आधार पर स्विफ्ट डिजायर कार की तलाश शुरू कर दी थी। जिले के साथ आसपास के जनपदों को भी सूचना भेजी गई। देर रात तक प्रमुख मार्गों और हाईवे पर चेकिंग अभियान चलाया गया, लेकिन आरोपी पुलिस को चकमा देकर कानपुर पहुंच गए। वहां हत्या के बाद शव को ठिकाने लगा दिया। अपहरण में इस्तेमाल कार अभी तक बरामद नहीं हो सकी है। दुर्गा मंदिर चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी पुलिस के लिए मददगार साबित नहीं हुई। कैमरों में कार और संदिग्धों की तस्वीरें स्पष्ट नहीं होने से उनकी पहचान में परेशानी आई।
अपहरण के मुकदमे में हत्या की धाराएं बढ़ीं, सीओ करेंगे जांच
शनिवार को अधिवक्ता के पुत्र की तहरीर पर पुलिस ने तीन स्विफ्ट डिजायर सवारों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया था। रविवार को शव बरामद होने के बाद हत्या और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं बढ़ा दी गईं। मामले की जांच सीओ राजेश कमल को सौंपी गई है। पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने भी कालपी पहुंचकर मामले की जानकारी ली। उन्होंने जमीन विवाद को हत्या की वजह बताते हुए जल्द आरोपियों और साजिशकर्ताओं का खुलासा करने की बात कही।
चार बार चुने गए थे अधिवक्ता एसोसिएशन के अध्यक्ष
गयादीन अहिरवार की अधिवक्ताओं के बीच अच्छी पकड़ थी। वह चार बार अधिवक्ता एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए थे। पिछले वर्ष फरवरी में हुए चुनाव में भी उन्होंने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी। उनकी हत्या की खबर से अधिवक्ताओं में आक्रोश फैल गया। नगर में तनाव की आशंका को देखते हुए शनिवार रात से ही अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। रविवार को शव मिलने के बाद कालपी को छावनी में तब्दील कर दिया गया। कई थानों का पुलिस बल तैनात रहा और सीओ स्तर के अधिकारी कोतवाली में मौजूद रहकर स्थिति पर नजर रखते रहे।
एक साल पहले बेटे की मौत से टूट गया था परिवार
गयादीन अहिरवार के परिवार पर एक साल के भीतर दूसरी बड़ी विपत्ति आई है। 31 अक्तूबर 2025 को उनके बेटे गौरव ने पारिवारिक विवाद और पत्नी से अलगाव के चलते विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। बेटे की मौत के बाद से परिवार परेशान था। उनकी दो बेटियां हैं। एक बेटी की शादी झांसी में हुई है, जबकि दूसरी बेटी मीना उनके साथ रहकर वकालत करती थीं और पिता के चैंबर का काम संभालती थीं।
40 साल पहले कुरहना आलमगीर से कालपी आकर बस गए थे अधिवक्ता गयादीन
कालपी। अधिवक्ता संघ अध्यक्ष गयादीन अहिरवार करीब 40 साल पहले कदौरा ब्लॉक के कुरहना आलमगीर गांव से कालपी आकर बस गए थे। इसके बाद उन्होंने यहीं रहकर वकालत शुरू की और अधिवक्ताओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। बताया जाता है कि गांव में उनकी पुश्तैनी जमीन थी, जिसकी देखरेख और विवादों के सिलसिले में वह अक्सर गांव जाते थे। उन्होंने कुछ जमीन और भी खरीदी थी। ग्रामीणों के मुताबिक, गयादीन मिलनसार स्वभाव के थे। अधिवक्ताओं के बीच भी उनका अच्छा प्रभाव था। वह लगातार अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चुने जाते रहे। उनकी हत्या से अधिवक्ताओं में रोष है।

