उरई। जिले में सरकारी वाहनों की आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर आईएएस व एसडीएम न्यायिक सदर रिंकू सिंह राही ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन वाहनों के संचालन में नियमों की अनदेखी, संविदाकार के स्थान पर बिचौलियों के माध्यम से काम कराने, गैर-व्यावसायिक वाहनों का इस्तेमाल और चालकों को समय से भुगतान न किए जाने जैसी अनियमितताओं की शिकायत कर उन्होंने डीएम से पूरे प्रकरण की जांच और आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति की है।
31 अगस्त को डीएम को भेजे गए पत्र के अनुसार जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से 25 अगस्त को संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से जिले में संचालित शासकीय वाहनों की व्यवस्था और उससे जुड़े मामलों की जांच एवं सुझाव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद उपलब्ध कराए गए वाहनों और व्यवस्था की पड़ताल में प्रथम दृष्टया कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्हें नियमों के अनुरूप नहीं माना गया है।
पत्र में सरकारी कार्य के लिए उपलब्ध कराए गए एक वाहन की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वाहन पर पीली/व्यावसायिक नंबर प्लेट नहीं थी। पत्र में सवाल उठाया गया है कि यदि सरकारी कार्य के लिए आउटसोर्स किए गए वाहन के लिए व्यावसायिक पंजीकरण और पीली नंबर प्लेट अनिवार्य है तो बिना इसके वाहन का शासकीय कार्य में इस्तेमाल किया जाना परिवहन नियमों के अनुपालन का गंभीर विषय है।
चालक को करीब छह हजार रुपये भुगतान का मामला
वाहन चालकों के भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पत्र में उपलब्ध जानकारी के आधार पर चालक को करीब छह हजार रुपये प्रतिमाह अथवा न्यूनतम मजदूरी से अधिक का भुगतान किए जाने का उल्लेख है। साथ ही यह भी कहा गया है कि भुगतान कई-कई महीनों तक लंबित रहने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे चालकों के आर्थिक शोषण की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है।
जांच कर कार्रवाई की मांग
एसडीएम ने मामले में उपलब्ध कराए गए वाहनों का नियमानुसार परीक्षण कराने, संबंधित प्रकरण की आवश्यक जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। साथ ही भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यवस्था में सुधार किए जाने की जरूरत बताई गई है।
