फोटो – 29 लोक अदालत का निरीक्षण करते जिला न्यायाधीश विरजेंद्र कुमार सिंह। संवाद
फोटो – 30 न्यायाधीश के सामने खड़े समझौता होने के बाद दंपती। संवाद
– तलाक और भरण-पोषण के मुकदमों में पति-पत्नी फिर साथ रहने को हुए राजी, बैंक के कर्ज में भी मिली छूट
– 2.39 लाख मामलों का निस्तारण, 5.50 लाख रुपये कोष में जमा, दुर्घटना के 64 मामलों में 1.32 करोड़ की क्षतिपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को परिवार न्यायालय में तलाक और भरण-पोषण के मुकदमों में पति-पत्नी ने आपसी मतभेद भुलाकर फिर साथ रहने का फैसला किया। वहीं कर्ज के बोझ से परेशान लोगों को भी समझौते के बाद राहत मिली। एक मामले में तीन लाख रुपये का लिया गया कर्ज ब्याज समेत साढ़े तीन लाख रुपये पहुंच गया था, जिसे समझौते के बाद एक लाख रुपये में निपटा दिया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ सुबह 10 बजे जनपद न्यायाधीश विरजेंद्र कुमार सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप जलाकर किया। जनपद न्यायालय के साथ ही तहसीलों में स्थित दीवानी न्यायालयों में भी लोक अदालत आयोजित हुई। जिले में न्यायालय और जिला प्रशासन के स्तर पर कुल 2,39,074 मामलों का निस्तारण किया गया।
फोटो – 31 प्रमोद।
छह साल पुराना कर्ज, एक लाख में हुआ निपटारा
इकलासपुरा निवासी प्रमोद कुमार ने वर्ष 2019 में केनरा बैंक से पंखा-कूलर बनाने के लिए तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। ब्याज बढ़ता गया और रकम करीब साढ़े तीन लाख रुपये पहुंच गई। लोक अदालत में समझौते के बाद शेष करीब डेढ़ लाख रुपये के दावे का निस्तारण एक लाख रुपये में कर दिया गया।
तलाक का मुकदमा किया, लोक अदालत में फिर साथ रहने को तैयार
रामनगर निवासी एक व्यक्ति ने जनवरी 2026 में पत्नी जयंती के खिलाफ तलाक का मुकदमा दायर किया था। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। लोक अदालत में परिवार न्यायालय की पहल पर दोनों पक्षों की काउंसलिंग और समझाइश हुई। आखिरकार पति-पत्नी फिर साथ रहने पर सहमति जता दी।
फोटो – 32 गया प्रसाद।
बेटी की शादी के लिए लिया कर्ज, 1.35 लाख जमा कर खत्म हुआ मामला
महेवा ब्लॉक के नरहान निवासी गंगाप्रसाद के पिता जीराखन ने वर्ष 2016 में बेटी की शादी के लिए 2.40 लाख रुपये का ऋण लिया था। कर्ज का मामला लंबे समय से चला आ रहा था। लोक अदालत में समझौते के बाद गंगाप्रसाद ने 1.35 लाख रुपये जमा किए।
64 दुर्घटना मामलों में 1.32 करोड़ की क्षतिपूर्ति
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी सुदीप कुमार जायसवाल ने 64 मामलों में बीमा कंपनियों से पीड़ित याचियों को 1 करोड़ 32 लाख 30 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाई। जनपद न्यायाधीश विरजेंद्र कुमार सिंह ने 41 मुकदमों का निस्तारण करते हुए पक्षकारों को 2 करोड़ 21 लाख 71 हजार 432 रुपये की धनराशि दिलाई।
प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय मनोज कुमार सिंह गौतम ने 16 मुकदमों का निस्तारण किया और छह वैवाहिक मामलों का प्रीलिटिगेशन स्तर पर समाधान कराया। अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय प्रवीण कुमार पाण्डेय ने 62 मुकदमों का निस्तारण करते हुए 10 वैवाहिक मामलों में समझौता कराया।
बैंक के 577 मामलों में समझौता
लोक अदालत में विभिन्न बैंकों के बकाया ऋण से जुड़े 577 मामलों में समझौता कराया गया। विभिन्न न्यायालयों द्वारा 5 लाख 50 हजार 440 रुपये की धनराशि कोष में जमा कराई गई।

फोटो – 30 न्यायाधीश के सामने खड़े समझौता होने के बाद दंपती। संवाद

फोटो – 30 न्यायाधीश के सामने खड़े समझौता होने के बाद दंपती। संवाद
