माधौगढ़/सिरसा कलार। रबी की बोआई का समय तेजी से निकल रहा है, लेकिन वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 12 दिन से बी-पैक्स सहकारी समितियों के कर्मचारी की हड़ताल खत्म नहीं हुई है।ऐसे में किसान 300 से 400 रुपये अधिक कीमत पर डीएपी खरीद रहे हैं। जिन किसानों के पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं, वे दूसरों से कर्ज लेकर खाद का इंतजाम कर रहे हैं।
सिरसा कलार क्षेत्र की सहकारी समिति सिरसा कलार, जखा, बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समिति दमरास और नियामतपुर से करीब 50 गांवों के किसान जुड़े हैं। इन समितियों पर पिछले 12 दिनों से ताले लटकने के कारण किसान रोजाना खाद मिलने की उम्मीद में चक्कर काट रहे हैं। किसानों का कहना है कि कोई साइकिल से तो कोई पेट्रोल खर्च कर समितियों तक पहुंचता है, लेकिन हर बार निराश होकर लौटना पड़ता है। निजी दुकानों पर डीएपी की बोरी 1600 से 1700 रुपये तक मिल रही है, जबकि सरकारी दर 1350 रुपये है। ऐसे में प्रति बोरी 300 से 400 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं।
किसानों के सामने सिर्फ खाद का ही संकट नहीं है। मटर का बीज 4500 से 5000 रुपये तक मिल रहा है। मसूर की बोआई और खेत की तैयारी का खर्च भी बढ़ गया है। जुताई के लिए 250 रुपये प्रति बीघा तक देने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि समिति से खाद मिल जाती तो प्रत्येक बोरी पर 300 से 400 रुपये की बचत होती। आर्थिक रूप से कमजोर किसान पहले ही बीज और जुताई के खर्च से परेशान हैं। अब खाद खरीदने के लिए भी उन्हें दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ रहा है।
उधर, माधौगढ़ तहसील क्षेत्र की 18 बी-पैक्स समितियों पर भी हड़ताल का असर है। गोपालपुरा, मिझौना, अटागांव, हरौली, धमना, गोहन, गोरा भूपका, सरावन, अमखेड़ा, रुद्रपुरा, रामपुरा, सिद्धपुरा, टीहर, जगम्मनपुर, ऊमरी, मजीठ, नावर और बहादुरपुर समितियों के सचिव, आंकिक, विक्रेता और चपरासी हड़ताल पर हैं। भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष शिवबालक सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह और वृजेंद्र सिंह ने कहा कि रबी की बोआई के महत्वपूर्ण समय में समितियों पर खाद न मिलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि हड़ताल के बावजूद खाद वितरण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाए।
नवंबर का महीना शुरू हो चुका है और 15 नवंबर से गेहूं की बोआई की तैयारी में जुटे किसानों को अब आगे यूरिया की जरूरत भी पड़ेगी। ऐसे में उन्हें आशंका है कि यदि समितियों पर खाद वितरण शुरू नहीं हुआ तो डीएपी के साथ यूरिया के लिए भी निजी दुकानों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इससे खेती की लागत और बढ़ जाएगी। किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिली तो महंगे बीज और खेत की तैयारी पर खर्च करने के बावजूद बोआई प्रभावित हो सकती है।
किसान कैसे करा पाएगा बोआई
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फोटो- 28 शत्रुघ्न सिंह।
शत्रुघ्न सिंह निवासी रिछारा ने बताया कि समितियों पर खाद नहीं मिलने से खेती महंगी होती जा रही है। खाद खरीदने के लिए दूसरों से कर्ज लेना पड़ रहा है। महंगी खाद, महंगे बीज और जुताई के खर्च के बीच किसान बोआई कैसे कर पाएगा।
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फोटो- 29 राकेश राजपूत।
राकेश राजपूत निवासी छोटी मुनिया ने बताया कि अभी तक खाद नहीं मिली है। बार-बार समिति के चक्कर लगा रहे हैं। बाजार में डीएपी की बोरी अधिक दामों मिल रही है। इतनी महंगी खाद खरीदने की आर्थिक स्थिति नहीं है। किसान परेशान हैं।
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यह बोले जिम्मेदार
कर्मचारियों को काम पर वापस लाने के लिए अल्टीमेटम दिया जा चुका है। वैकल्पिक व्यवस्था का दायरा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
– शिवकुमार, एआर को-ऑपरेटिव

फोटो- 27 जखा सहकारी समिति के बाहर खाद के लिए आए किसान। संवाद– फोटो : Archive

फोटो- 27 जखा सहकारी समिति के बाहर खाद के लिए आए किसान। संवाद– फोटो : Archive

