बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। हालात यह हैं कि पिछले दो वर्षों में जिले के परिषदीय विद्यालयों से करीब 22 हजार से अधिक बच्चों ने दूरी बना ली। नामांकन घटकर अब महज 1.09 लाख पर सिमट गया है। छात्र संख्या में लगातार गिरावट से कई स्कूलों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है।
जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के कुल 1395 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 831 प्राथमिक विद्यालय, 257 जूनियर हाईस्कूल और 307 कंपोजिट विद्यालय शामिल हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार शैक्षिक सत्र 2023-24 में इन स्कूलों में कुल 1,31,386 विद्यार्थी पंजीकृत थे। अगले ही सत्र 2024-25 में यह संख्या घटकर 1,18,665 रह गई। वहीं, 2025-26 में नामांकन और गिरकर 1,09,001 तक पहुंच गया।
दो वर्षों में कुल 22,385 विद्यार्थियों की कमी दर्ज की गई है। इनमें 12,421 बालक और 9,964 बालिकाएं शामिल हैं। सबसे ज्यादा गिरावट कक्षा एक से पांच तक के नामांकन में देखने को मिली है। जिले के कई प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां छात्र संख्या 30 से भी नीचे पहुंच गई है। शिक्षा विभाग के लिए चिंता की बात यह है कि सरकार परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, मिड-डे मील, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे और ऑपरेशन कायाकल्प जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद अभिभावकों का भरोसा सरकारी स्कूलों से कम होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों का बढ़ता प्रभाव, अंग्रेजी माध्यम की चाह, बेहतर अनुशासन व पढ़ाई की उम्मीद अभिभावकों को निजी विद्यालयों की ओर खींच रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब लोग कम संसाधनों के बावजूद बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना पसंद कर रहे हैं। यदि नामांकन में गिरावट का यही सिलसिला जारी रहा तो आने वाले समय में कई स्कूलों के विलय अथवा बंद होने की नौबत आ सकती है।
किस वर्ष कितने विद्यार्थियों का हुआ नामांकन
2023-24
बालक : 65,916
बालिका : 65,470
कुल : 1,31,386
2024-25
बालक : 59,014
बालिका : 59,651
कुल : 1,18,665
2025-26
बालक : 53,495
बालिका : 55,506
कुल : 1,09,001
इनका यह है कहना
परिषदीय विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए स्कूल चलो अभियान तेज किया जा रहा है। घर-घर संपर्क, रैली और प्रभात फेरी के माध्यम से अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। साथ ही स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं और शैक्षिक वातावरण की जानकारी भी दी जाएगी। – विपुल शिव सागर, बीएसए, झांसी
सुलगते सवाल…
– करोड़ों खर्च के बावजूद क्यों घट रहा सरकारी स्कूलों पर भरोसा?
– क्या केवल योजनाएं काफी हैं, पढ़ाई की गुणवत्ता नहीं?
– आखिर अभिभावक क्यों छोड़ रहे परिषदीय स्कूल?
– क्या अंग्रेजी माध्यम की दौड़ में पिछड़ गए सरकारी विद्यालय?
– छात्र घटे तो क्या बंद होंगे छोटे परिषदीय स्कूल?
– नामांकन बढ़ाने के अभियान जमीन पर क्यों नहीं दिखते?
– क्या स्कूलों में शिक्षक और संसाधनों का सही उपयोग हो रहा है?
– क्या लगातार छात्र संख्या घटने पर किसी की जिम्मेदारी तय होगी?
