पितृ पक्ष की शुरुआत शनिवार को पूर्णिमा से हो रही है, जो 10 अक्तूबर, सर्वपित्र मोक्ष अमावस्या तक चलेंगे। श्री गोपीनाथ मंदिर के महंत व जिला धर्माचार्य विष्णुदत्त स्वामी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्राद्ध करने वाले परिवार पर हमेशा पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है।

पूर्णमासी से श्राद्ध पक्ष प्रारंभ होकर अगले माह की 10 तारीख तक अमावस्या तक रहेंगे। जिला धर्माचार्य ने कुश की अंगूठी धारण करने और कुशा से तर्पण करने को कहा। जौ, चावल, रोली, चंदन से नदी व तालाब के तट पर पितरों का आह्वान कर आशीर्वाद मांगना चाहिए।

पिता या दादा की तिथि पर ब्राह्मण को भोजन कराएं। मां और दादी की श्राद्ध तिथि पर ब्राह्मण महिला को भोजन कराना चाहिए। सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा और वस्त्रों का दान देना भी आवश्यक है। गो ग्रास, काक, श्वान और सूक्ष्म जीवों को पूड़ी और खीर खिलाना जरूरी है। गयाजी में पूर्वजों को छोड़ आए लोग अमावस्या पर तीन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दे सकते हैं। जरूरतमंदों की मदद करने से भी पूर्वजों का विशेष आशीर्वाद मिलता है। श्राद्ध करने वाले व्यक्ति निरोगी रहते हैं और पितृ दोष समाप्त हो जाता है।

पितृ पक्ष में वर्जित कार्य

जिला धर्माचार्य महंत विष्णुदत्त स्वामी ने बताया कि पितृ पक्ष में दाढ़ी और बाल नहीं बनवाने चाहिए। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, कोई भी नया सामान नहीं खरीदना चाहिए। ये नियम श्राद्ध करने वाले परिवारों के लिए अनिवार्य हैं।

श्राद्ध के दौरान आचरण

जिला धर्माचार्य महंत विष्णुदत्त स्वामी ने कहा कि पितृ पक्ष में श्राद्ध करने वाले परिवार को सत्य बोलना चाहिए। क्रोध पर पूरी तरह नियंत्रण रखना भी जरूरी है। अतिथि का आदर करना भी आवश्यक बताया गया है। इन नियमों का पालन करने से ही पूर्वजों की कृपा संभव है।



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