राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम में लगातार तीन वर्षों से प्रदेश में अव्वल रहे जिला अस्पताल में अब मोतियाबिंद ऑपरेशन पर संकट खड़ा हो गया है। एक साल से बजट न मिलने और लेंस की आपूर्ति ठप होने से मरीजों को लंबा इंतजार झेलना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि अधिकतर पावर के लेंस खत्म हो चुके हैं, जिससे अस्पताल में रोज होने वाले ऑपरेशन की संख्या तेजी से घट गई है।

जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में झांसी के साथ-साथ आसपास के जिलों से भी मरीज ऑपरेशन के लिए पहुंचते हैं। यही वजह है कि अस्पताल लगातार तीन वर्षों से प्रदेश में शीर्ष स्थान पर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 12,549 मोतियाबिंद ऑपरेशन किए गए, लेकिन लेंस की कमी के कारण इस वित्तीय वर्ष में यह रफ्तार तेजी से गिर रही है।

ऑपरेशन के लिए मरीजों को दी जा रही आगे की तारीख

सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में केवल 18डी पावर के सीमित लेंस उपलब्ध हैं। ऐसे में उन्हीं मरीजों के ऑपरेशन हो पा रहे हैं, जिन्हें इसी पावर की आवश्यकता है। पहले जहां रोजाना औसतन 80 ऑपरेशन होते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर करीब 15 रह गई है। स्थिति यह है कि मरीजों को ऑपरेशन के लिए दो से तीन महीने आगे की तारीख दी जा रही है।

अन्य जिलों से मांगे गए लेंस

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सक्सेना ने जालौन और ललितपुर के सीएमएस को पत्र भेजकर 18डी से 24डी तक के लेंस उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इसके अलावा शासन-प्रशासन को भी पत्राचार किया गया है।

एक साल से नहीं मिला बजट

राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत निजी अस्पतालों को प्रति ऑपरेशन 2000 रुपये और सरकारी अस्पतालों को 1000 रुपये मिलते हैं, लेकिन वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट जारी नहीं हुआ। ऐसे में आयुष्मान योजना और कल्याण समिति की राशि से लेंस खरीदकर काम चलाया जा रहा था।

एक वर्ष से बजट नहीं मिला है, लेकिन लेंस की उपलब्धता के लिए शासन स्तर पर प्रयास जारी हैं। – डॉ. रविशंकर, नोडल अधिकारी



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