डीएम ने बिना पंजीकृत चल रहे नर्सिंगहोम की जांच के लिए 12 मई को आदेश दिए थे। इसके बाद सात टीमें भी बनाई गईं लेकिन हैरत की बात तो यह है कि सात दिन बीतने के बाद भी टीमों ने एक भी नर्सिंगहोम की जांच नहीं की। इससे टीम के अधिकारियों की मंशा पर ही सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में सिर्फ 130 नर्सिंगहोम चल रहे हैं जबकि हकीकत एकदम अलग है। शहर में ही 150 से ज्यादा नर्सिंगहोम चल रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के पास क्षेत्र की गलियों में नर्सिंगहोम चल रहे हैं जो शासन से निर्धारित मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नियमित निरीक्षण का दावा करते हैं जिन्हें अपंजीकृत नर्सिंगहोम दिखाई नहीं देते हैं। 12 मई को डीएम गौरांग राठी ने अपंजीकृत नर्सिंगहोम पर अंकुश लगाने के लिए सात टीमें गठित की थी। आदेश दिए कि टीमें नर्सिंगहोम की जांच करके रिपोर्ट देंगी मगर एक भी टीम जांच करने के लिए नहीं निकली है।
डीएम की तरफ से जारी आदेशानुसार सात टीमें का कार्यक्षेत्र बांट दिया गया है। जिसके तहत पहली टीम नगरीय क्षेत्र-ए में नवाबाद, कोतवाली, सदर बाजार क्षेत्र, दूसरी टीम नगरीय क्षेत्र-बी में प्रेमनगर व सीपरी बाजार, तीसरी टीम तहसील सदर क्षेत्र का ग्रामीण क्षेत्र, चौथी टीम मोंठ क्षेत्र, पांचवीं टीम गरौठा क्षेत्र, छठवी टीम मऊरानीपुर क्षेत्र व सातवीं टीम टहरौली क्षेत्र के नर्सिंगहोम की चेकिंग करेगी। प्रत्येक टीम में पुलिस, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को शामिल किया गया है।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि टीम में प्रशासन-पुलिस के भी अधिकारी हैं इसलिए तालमेल बनाने के बाद ही टीमें चेकिंग के लिए निकल सकेंगी। अधीनस्थों से कहा जाएगा कि वह तालमेल बनाकर चेकिंग के लिए जाएं।
