बबीना। साहित्यिक मासिक काव्य गोष्ठी के सौजन्य से लगातार तेरहवें वर्ष भी कवि एवं साहित्यकार सुशील जैन के निवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में विभिन्न विधाओं के कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल देखने को मिली।
गोष्ठी की अध्यक्षता झांसी के सुप्रसिद्ध बुंदेली कवि बाला प्रसाद यादव ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में गोपाल नारायण कुमुद उपस्थित रहे। कार्यक्रम के शुभारंभ पर सुशील जैन ने सरस्वती वंदना की। कवि प्रवेश नायक ने वीर रस की रचना प्रस्तुत करते हुए कहा, वीरता की अवतार भई, इतिहास लिखा गई झांसी को, बुंदेलखंड को नाम करके धूल में मिला गईं गोरन खों। वहीं काशीराम अकेला ने देशभक्ति से ओतप्रोत पंक्तियां हम आजादी के परवाने, हम वतन पे मरने मिटने वाले प्रस्तुत कर माहौल में जोश भर दिया। जाने-माने साहित्यकार रामनाथ कव्वाल ने एक से बढ़कर एक गजलें सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।
झांसी के बलवीर सिंह यादव ने चौकड़िया प्रस्तुत की। प्रकाश दुबे ने अपनी रचना प्रियवर तुमसे होता अनुराग नहीं सुनाई। मुख्य अतिथि गोपाल नारायण कुमुद ने बुंदेली रचना धर्मा जवहि विधायक बन गऔ, पिछलग्गू सम्राट ऊंट वो गधा सुरीलो बन गऔ सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। गोष्ठी के अध्यक्ष बाला प्रसाद यादव ने वृद्धावस्था और बदलते सामाजिक सरोकारों पर बुंदेली रचना प्रस्तुत करते हुए कहा, वृद्धा आश्रम में बाई दद्दा प्रान गंवा रए, लल्ला जब से बने कलट्टर वृद्धाश्रम पौंचा रए।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए सुशील जैन ने सिकंदर के प्रसंग के माध्यम से जीवन की नश्वरता को रेखांकित करते हुए कहा, रहे हाथ खाली, कमाई खाक मुट्ठी भर, गुजरते हुए यही कहता रहा सिकंदर। गोष्ठी के दौरान कवियों की रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर प्रकाश जैन, रमेश साहू, कमलेश पांडे, चंद्र प्रकाश राय, प्रवीण कोतवाल, राजकुमार साहू आदि उपस्थित रहे।
