झांसी। रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के परास्नातक विद्यार्थियों का शोध अब किसानों की समस्याओं और खेतों तक पहुंच रहा है। विश्वविद्यालय ने कृषि, उद्यानिकी, वानिकी, मत्स्य पालन और पशु चिकित्सा विज्ञान में 100 शोध प्रबंध पूरे किए हैं। इसका लक्ष्य वर्ष 2027 तक 300 परास्नातक शोध प्रबंध जमा कराना है।
विद्यार्थियों ने शोध में बायोटेक्नोलॉजी, नैनोटेक्नोलॉजी, जीनोमिक्स, जीन एडिटिंग और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया है। इन तकनीकों से किसानों और समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान तलाशा जा रहा है। शोध पत्रों के पेटेंट मिलने से नई तकनीकों को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि पैकेज ऑफ प्रैक्टिस और नई तकनीकों से खेती के लिए वैज्ञानिक गाइडलाइन बनेगी। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ ही लागत कम करने में भी मदद मिलेगी।
कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी विज्ञान और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से समाज और कृषि क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान तलाश रहे हैं। शिक्षा निदेशक प्रो. अनिल कुमार ने कहा कि करीब 100 शोध प्रबंधों की उपलब्धि विद्यार्थियों और मार्गदर्शकों की अकादमिक उत्कृष्टता को दर्शाती है।