झांसी। पुराने और कंडम वाहनों के वैज्ञानिक निस्तारण की योजना झांसी में छह साल से फाइलों में अटकी है। बड़ागांव में स्क्रैप सेंटर के लिए जमीन चिह्नित होने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका है। ठेकेदार की रुचि न लेने के कारण संभागीय परिवहन विभाग और वाहन मालिक दोनों परेशान हैं। इससे कंडम वाहनों का नियमानुसार निस्तारण नहीं हो पा रहा है।

वाहन मालिकों को अपने कंडम वाहनों के निस्तारण के लिए अधिकृत सेंटर की आवश्यकता होती है। झांसी में स्थानीय सुविधा न होने से उन्हें दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे उनका समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। स्क्रैप सेंटर के लिए बड़ागांव में जमीन चिह्नित होने पर जल्द निर्माण की उम्मीद थी।

हालांकि, छह साल बाद भी यह सेंटर अस्तित्व में नहीं आ सका है। विभागीय स्तर पर योजना लंबित रहने से कंडम वाहनों के निस्तारण की समस्या बनी हुई है। परिवहन विभाग के लिए भी पुराने वाहनों को नियमानुसार प्रक्रिया से बाहर करना मुश्किल हो रहा है। रिकॉर्ड अपडेट करने में अधिकृत स्क्रैप सेंटर की भूमिका महत्वपूर्ण है। स्थानीय सेंटर न होने से यह पूरी व्यवस्था धीमी पड़ गई है।

स्क्रैप सेंटर का महत्व और अटकाव

परिवहन विभाग के अधिकृत स्क्रैप सेंटर (आरवीएसएफ) सरकारी मान्यता प्राप्त केंद्र होते हैं। यहां पुराने, अनुपयुक्त और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाता है। इन वाहनों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से पुनर्चक्रित किया जाता है। एआरटीओ (प्रशासन/प्रवर्तन) झांसी सुजीत सिंह के अनुसार, छह साल पहले स्क्रैप सेंटर का ठेका मंगलमूर्ति फर्म को दिया गया था। बड़ागांव में भूमि भी चिह्नित थी, लेकिन ठेकेदार की रुचि न लेने के कारण सेंटर शुरू नहीं हो सका।

वाहन मालिकों को मिलने वाले लाभ

कंडम वाहन को स्क्रैप कराने पर वाहन मालिक को उसकी एक्स-शोरूम कीमत का करीब चार से छह फीसदी तक स्क्रैप मूल्य मिलता है। स्क्रैप सेंटर से सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट प्राप्त होता है। यह सर्टिफिकेट दिखाने पर नया निजी वाहन खरीदने पर रोड टैक्स में 25 फीसदी तक छूट मिलती है। कमर्शियल वाहनों पर 15 फीसदी छूट का प्रावधान है। कई ऑटोमोबाइल कंपनियां नया वाहन खरीदने पर अतिरिक्त छूट भी देती हैं। परिवहन विभाग में सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट और डिस्ट्रक्शन सर्टिफिकेट मिलने से गाड़ी का नंबर आरटीओ से हमेशा के लिए डी-रजिस्टर हो जाता है।

स्क्रैप के प्रमुख नियम

कमर्शियल गाड़ियां 15 साल बाद और निजी गाड़ियां 20 साल बाद फिटनेस टेस्ट के आधार पर स्क्रैप की जाती हैं। तय समय सीमा के बाद गाड़ियों को ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर पर जांच करानी होती है। यदि कोई गाड़ी फिट नहीं पाई जाती है, तो उसे अनिवार्य रूप से स्क्रैप करना होता है। स्क्रैप सेंटर खोलने और चलाने के नियम केंद्रीय मोटरयान नियमों के तहत तय होते हैं। इनका संचालन पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण के कड़े मानकों के तहत किया जाता है।



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