झांसी। बलरामपुर में डीजे की तेज आवाज के बीच सात वर्षीय छात्रा की तबीयत बिगड़ने और मौत की घटना ने एक बार फिर कानफोड़ू शोर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। झांसी में भी सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में मानक से कई गुना अधिक आवाज में डीजे बजते हैं।

कोतवाली के सामने से भी ऐसे डीजे गुजरते हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक अत्यधिक शोर से सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ तनाव और हृदय संबंधी परेशानी का खतरा बढ़ सकता है।

तेज आवाज से बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा

मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज राय ने बताया कि तेज आवाज और उसके कंपन से तनाव एवं चिंता बढ़ सकती है। इससे ब्लड प्रेशर और शुगर का स्तर बढ़ने की स्थिति बन सकती है। दिल में ब्लॉकेज या धड़कन संबंधी समस्या वाले लोगों में इसका असर गंभीर हो सकता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर केवल सड़क पर चलने वाले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि घरों में बैठे लोगों पर भी पड़ सकता है।

सुनने की क्षमता हो सकती है कम

जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मुकेश राजपूत ने बताया कि 100 डेसिबल से अधिक तेज आवाज कानों के लिए नुकसानदायक है। लंबे समय तक ऐसे शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता अस्थायी या स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। कान में सनसनाहट, दर्द, सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

पशु-पक्षियों में बढ़ता है तनाव

प्रभारी वन अधिकारी विकास यादव ने बताया कि 120 से 140 डेसिबल तक की अत्यधिक तेज आवाज से पशु-पक्षियों में घबराहट और डर पैदा होता है। तेज शोर से तनाव हार्मोन बढ़ने के कारण उनका व्यवहार प्रभावित हो सकता है। गर्भवती गाय, भैंस और बकरी जैसे पशुओं में अत्यधिक तनाव से गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।

लगातार तेज आवाज पक्षियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को भी प्रभावित करती है। वे आवाज के जरिये एक-दूसरे से संवाद करने और दिशा तय करने का काम करते हैं। अत्यधिक शोर इस प्रक्रिया में बाधा डाल सकता है और उन्हें अपने आवास या भोजन के स्थान से दूर जाने के लिए मजबूर कर सकता है।

कार्रवाई में पुलिस सुस्त

सहालग और धार्मिक जुलूसों में डीजे का इस्तेमाल लगातार होता है। खासतौर पर धार्मिक आयोजनों में तेज आवाज वाले डीजे सड़कों से गुजरते हैं, लेकिन इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। गणेश प्रतिमा स्थापना के दौरान कोतवाली के सामने से कई डीजे मानक से कई गुना अधिक शोर करते हुए निकले। विसर्जन के दौरान भी ऐसी ही स्थिति रही। यातायात पुलिस उपाधीक्षक मुकेश सिंह ने कहा कि मानक के अनुरूप न मिलने वाले डीजे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।

——————–

धर्माचार्य बोले- डीजे की जगह शंख, घंटा-घड़ियाल बजें

धार्मिक आयोजनों में तेज आवाज पर जताई नाराजगी, प्रशासन से सख्ती की मांग

संवाद न्यूज एजेंसी

झांसी। त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में तेज आवाज में बजने वाले डीजे पर धर्माचार्यों और धर्मगुरुओं ने रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों में डीजे की तेज आवाज के बजाय शंख, घंटा-घड़ियाल और झालर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

श्री गोपीनाथ मंदिर के पुजारी एवं जिला धर्माचार्य महंत विष्णुदत्त स्वामी ने कहा कि गणेश पंडालों और विसर्जन यात्राओं में तेज आवाज वाले डीजे से परेशानी हो रही है। इसकी आवाज में जयकारे दबकर रह जाते हैं। डीजे की जगह शंख, घंटा-घड़ियाल बजाए जाने चाहिए। तेज आवाज से बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी होती है। उन्होंने प्रशासन से इस पर ध्यान देने की अपील की।

धर्माचार्य आचार्य हरिओम थापक ने कहा कि डीजे को धीमी आवाज में ही बजाया जाना चाहिए। गणेश उत्सव और अन्य धार्मिक आयोजनों में जयकारों के साथ घंटा और शंख का इस्तेमाल किया जाए, तो बेहतर होगा।

रघुनाथ जी मंदिर, सीपरी बाजार के पुजारी एवं धर्मगुरु कैलाश नारायण पाठक ने बताया कि उन्होंने स्पीड पोस्ट के माध्यम से डीआईजी को पत्र भेजकर गणेश उत्सव में तेज आवाज वाले डीजे पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि तेज आवाज में डीजे बजाना धर्म नहीं है। प्रशासन को इस पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।

नगर धर्माचार्य आचार्य हरिओम पाठक ने कहा कि डीजे धीमी आवाज में बजना चाहिए, ताकि बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी न हो। धार्मिक आयोजनों में जयकारों, शंख और झालर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

तेज डीजे से रानीमहल का उखड़ रहा प्लास्टर

झांसी। पुरातत्व विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक धार्मिक आयोजनों के दौरान तेज आवाज में बजने वाले डीजे के कंपन से रानीमहल की दीवारों और प्लास्टर को नुकसान पहुंच रहा है। ऐतिहासिक इमारत की दीवारों और प्लास्टर की उम्र अधिक होने के कारण तेज कंपन का असर पड़ता है। विभाग को समय-समय पर इसकी मरम्मत करानी पड़ती है। ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। संवाद



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *