झांसी। चार साल पुराने हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम नेत्रपाल की अदालत ने अहम फैसला दिया। अदालत ने पड़ोसी की हत्या के दोषी संतोष आदिवासी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी पर कुल 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने संतोष आदिवासी को बुधवार को भारतीय दंड संहिता की दफा 302 के तहत दोषी ठहराया था। बृहस्पतिवार को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही उस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। एक अन्य धारा के तहत उसे 10 साल के कारावास की सजा मिली है। इस धारा में 20 हजार रुपये का जुर्माना भी शामिल है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। यह आदेश भी दिया गया कि अपील की अवधि समाप्त होने के बाद दोषी को पीड़ित के परिजनों को 75 हजार रुपये की राशि देनी होगी। यह राशि पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता होगी।
चार साल पुराना मामला
यह घटना मई 2022 में मोंठ थाना क्षेत्र के अखाड़ापुरा गांव में हुई थी। मृतक सुम्मा आदिवासी और उसके पड़ोसी संतोष आदिवासी उर्फ पिट्टे के बीच विवाद हो गया था। यह विवाद अचानक बढ़ गया और हिंसक रूप ले लिया। संतोष ने गुस्से में आकर कुल्हाड़ी से सुम्मा पर हमला कर दिया था। इस घटना ने पूरे गांव में सनसनी फैला दी थी। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया मृतक सुम्मा के बेटे राजेश ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। राजेश की तहरीर पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज किया। पुलिस ने अभियुक्त संतोष को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश की अदालत में लगातार चलती रही।
