झांसी। आपात स्थिति में लोगों की मदद के लिए लगाए गए पैनिक बटन ही अब बदहाली के शिकार हैं। कहीं बटन दबाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही तो कहीं यह होर्डिंग और बिजली के बॉक्स के पीछे छिप गया है। कई जगह आसपास के लोगों को यह तक पता नहीं कि यहां पैनिक बटन लगा हुआ है। ऐसे में सवाल है कि आपात स्थिति में जरूरतमंद इन बटनों तक पहुंचेगा कैसे और खराब पड़े बटन से मदद मिलेगी कैसे?

स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत करीब पांच साल पहले महानगर में 13 स्थानों पर पैनिक बटन लगाए गए थे। इन पर करीब पौने दो करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इनका उद्देश्य आपात स्थिति में खासकर महिलाओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना था। संवाददाता ने शनिवार को कई स्थानों पर पहुंचकर इन पैनिक बटनों की पड़ताल की तो व्यवस्था की हकीकत सामने आई।

इलाइट चौराहे पर बटन का पता ही नहीं

इलाइट चौराहे पर पैनिक बटन नजर नहीं आया। आसपास के लोगों से जानकारी करने पर उन्होंने बताया कि यहां लगा बॉक्स हटा दिया गया है। ऐसे में जिस व्यवस्था को आपातकालीन मदद के लिए स्थापित किया गया था, उसकी मौजूदगी ही मौके पर नजर नहीं आई।

बस स्टैंड पर दबाया, नहीं मिली प्रतिक्रिया

बस स्टैंड पर लगे पैनिक बटन को दबाकर देखा गया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि बटन काफी समय से खराब है। आपात स्थिति में किसी व्यक्ति को तत्काल मदद की जरूरत हो तो यहां से सहायता मिलने की उम्मीद करना मुश्किल है।

मेडिकल कॉलेज के पास होर्डिंग ने छिपाया

मेडिकल कॉलेज गेट नंबर एक के पास लगे पैनिक बटन की स्थिति भी ठीक नहीं मिली। स्थानीय लोगों ने बताया कि बटन खराब है। इसके सामने बल्लियों पर होर्डिंग लगा दी गई है, जिससे बटन काफी हद तक छिप गया है। ऐसे में जिसे इस सुविधा की जानकारी भी हो, उसके लिए इसे तलाशना आसान नहीं है।

आवास विकास में लोगों को जानकारी तक नहीं

आवास विकास चौराहे पर लगे पैनिक बटन के बारे में आसपास के ज्यादातर लोग अनजान नजर आए। पूछने पर लोगों ने कहा कि उन्हें जानकारी ही नहीं है कि पैनिक बटन कहां लगा है। इससे साफ है कि बटन लगाने के बाद लोगों को इसकी उपयोगिता और संचालन की जानकारी देने की व्यवस्था पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

गोविंद तिराहे पर दबाते ही मिला जवाब

पड़ताल के दौरान गोविंद तिराहे पर स्थिति कुछ अलग मिली। यहां पैनिक बटन दबाते ही तत्काल प्रतिक्रिया मिली। बातचीत में बताया गया कि लोग रास्ता और पता पूछने के लिए भी इसका इस्तेमाल करते हैं। मेडिकल इमरजेंसी और दुर्घटना की सूचना भी इसके माध्यम से दी जा सकती है। सूचना मिलने पर सहायता पहुंचाने की बात कही गई। पुलिस के पांच से दस मिनट में मौके पर पहुंचने की जानकारी भी दी गई।

इन 13 जगहों पर लगाए गए थे पैनिक बटन

इलाहाबाद बैंक चौराहा, आवास विकास चौराहा, बीकेडी चौराहा, इलाइट चौराहा, गोविंद तिराहा, जीवनशाह तिराहा, बस स्टैंड, कचहरी चौराहा, खंडेराव गेट, मिनर्वा चौराहा, रस बहार तिराहा, सदर बाजार और मेडिकल कॉलेज गेट नंबर एक के पास पैनिक बटन लगाए गए हैं।

पौने दो करोड़ खर्च, फिर भी निगरानी पर सवाल

पैनिक बटन लगाने पर करीब पौने दो करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। करीब पांच साल बाद इनकी स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ स्थानों पर बटन काम नहीं कर रहे हैं तो कहीं इनकी पहचान ही मुश्किल हो गई है। ऐसे में केवल बटन लगा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके नियमित रखरखाव, कैमरों से निगरानी और लोगों को इसकी जानकारी देने की भी जरूरत है।

कोट

महानगर में लगे सभी पैनिक बटन सही हैं और काम कर रहे हैं। अगर कहीं खराबी की सूचना मिलती है तो उसे तत्काल दुरुस्त कराया जाता है।

– राहुल कुमार यादव, एसीईओ, स्मार्ट सिटी लिमिटेड

बस स्टैंड पुलिस चौकी के पास खराब पड़ा पैनिक बटन l संवाद

बस स्टैंड पुलिस चौकी के पास खराब पड़ा पैनिक बटन l संवाद– फोटो : samvad



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