झांसी। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के तहत झांसी जनपद के ग्रामीण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बिजली का नुकसान हो रहा है। निगम ने पांच ग्रामीण फीडरों चिरगांव पावर हाउस के दो, बबीना, मऊरानीपुर व गुरसराय का एक-एक फीडर शामिल है। यहां 17 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली क्षति पाई है। इनमें चोरी के अलावा अन्य तरह से बिजली की क्षति हो रही है। मुख्य अभियंता ने संबंधित अभियंताओं को नोटिस जारी किए हैं। उन्हें 15 दिन के भीतर सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।

दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्यालय आगरा में ग्रामीण क्षेत्र के पांच फीडर चिह्नित किए गए हैं। इनमें बिजली की चोरी के अलावा अन्य तरह से नुकसान हो रहा है। उन्हें उच्च लाइन क्षति की श्रेणी में शामिल किया गया है। ये फीडर बिजली वितरण प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती है। इनमें चिरगांव पावर हाउस के टाउन -1 फीडर में 3.38 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जहां 84 फीसदी बिजली का नुकसान दर्ज किया गया। इसी पावर हाउस के टाउन -2 फीडर में 3.14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसमें 73.63 फीसदी लाइन लॉस रहा। वहीं बबीना पावर हाउस के बबीना ब्लॉक फीडर में 3.3 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, यहां 66.92 फीसदी लाइन लॉस दर्ज किया गया। मऊरानीपुर पावर हाउस के काशीराम फीडर पर 3.23 करोड़ रुपये का नुकसान पाया गया, जिसमें 85 फीसदी लाइन लॉस रहा। इसके अलावा, गुरसराय पावर हाउस में 74.65 फीसदी लाइन लॉस के साथ 341.93 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

चिह्नित फीडरों का विवरण

दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली चोरी के इलाके चिह्नित करने के लिए अभियान चलाया है। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्र के इन पांच फीडरों को विशेष रूप से चिह्नित किया गया। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र के गल्लामंडी पावर हाउस के तहत आने वाले तालपुरा व उनाव गेट पावर हाउस से निकले नारायण बाग फीडर को उच्च लाइन लॉस के लिए चिह्नित किया गया है।

अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस

मुख्य अभियंता (वितरण) ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के उच्च लाइन लॉस वाले फीडरों के लिए नोटिस जारी किए हैं। अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और अवर अभियंताओं को ये नोटिस भेजे गए हैं। इन नोटिसों में उनसे बिजली चोरी और लाइन लॉस के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। यह कदम बिजली वितरण प्रणाली में जवाबदेही तय करने के लिए उठाया गया है।

सुधार के लिए 15 दिन की मोहलत

जारी किए गए नोटिसों में अभियंताओं को 15 दिन का समय दिया गया है। उन्हें इस अवधि के भीतर बिजली चोरी की स्थिति में सुधार लाने का निर्देश दिया गया है। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। निगम ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



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