लखनऊ। सेमीकंडक्टर उद्योग में कॅरिअर बनाने के लिए विद्यार्थियों को अब सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रहने के बजाय चिप डिजाइन और हार्डवेयर डवलपमेंट का व्यावहारिक अनुभव भी हासिल करना होगा। इसी उद्देश्य से लखनऊ विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग की ओर से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। नौ और 10 अक्तूबर को हुई कार्यशाला में विद्यार्थियों को डिजिटल लॉजिक से लेकर वास्तविक चिप डिजाइन तक की प्रक्रिया समझाई गई।

वीएलएसआई एक्सप्लोरर : फ्रॉम डिजिटल लॉजिक टू रियल चिप्स विषय पर आयोजित कार्यशाला में एफओईटी के डीन प्रो. सत्येंद्र पाल सिंह समेत कई विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को डिजिटल सर्किट डिजाइन, हार्डवेयर डिस्क्रिप्शन लैंग्वेज, रजिस्टर ट्रांसफर लेवल डिजाइन और बेसिक सिमुलेशन की जानकारी दी। साथ ही डिजाइन प्रक्रिया में सिंथेसिस और इम्प्लीमेंटेशन से लेकर एफपीजीए तक के विभिन्न चरणों का प्रदर्शन किया गया। कार्यशाला के समापन पर हार्डवेयर लॉजिक डिजाइन प्रतियोगिता हुई।

कॅरिअर सत्र में विशेषज्ञों ने वीएलएसआई और सेमीकंडक्टर उद्योग में उपलब्ध अवसरों के बारे में बताया। विद्यार्थियों को आरटीएल डिजाइन, डिजाइन वेरिफिकेशन, फिजिकल डिजाइन, एफपीजीए, एम्बेडेड सिस्टम और हार्डवेयर डिजाइन जैसे क्षेत्रों में कॅरिअर की संभावनाओं से परिचित कराया गया। साथ ही दूसरे वर्ष से ही तकनीकी बुनियाद मजबूत करने और आगे प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप व इंडस्ट्री से जुड़े कौशल के माध्यम से प्लेसमेंट की तैयारी करने का रोडमैप समझाया गया। कार्यशाला के समापन पर एफओईटी के डीन प्रो. सत्येंद्र पाल सिंह ने विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरतों के अनुसार अपने कौशल को लगातार विकसित करने के लिए प्रेरित किया। विभागीय समन्वयक डॉ. मनोज कुमार जैन मौजूद रहे।



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