लखनऊ। राजधानी के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात में भारी असंतुलन है। कहीं बड़ी संख्या में बच्चों के मुकाबले शिक्षक कम हैं तो कई स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। प्राथमिक स्कूल तकरोही प्रथम में 157 बच्चों पर एक भी शिक्षक नहीं है। वहीं बेसिक स्कूल पुलगामा में 48 बच्चों पर चार शिक्षक तैनात हैं। ऐसे में कई विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

शिक्षकों के समायोजन से इस असंतुलन में सुधार की उम्मीद थी। आधा सत्र बीतने के बाद भी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। लखनऊ के नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के 1600 से अधिक परिषदीय विद्यालयों में करीब 1.36 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इनमें करीब 400 विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। कई प्राथमिक विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे हैं, जबकि दर्जनों स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है।

शिक्षकों का कहना है कि सत्र का महत्वपूर्ण समय बीत रहा है। यदि शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए अंतरिम व्यवस्था नहीं की गई तो शैक्षिक गुणवत्ता प्रभावित होगी। इसका असर निपुण आकलन पर भी पड़ सकता है।

समायोजन से 90 फीसदी स्कूलों में सुधार का दावा

विभाग के अनुसार, शिक्षकों के समायोजन से करीब 80 से 90 फीसदी विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार हो सकता है। इसी उद्देश्य से समायोजन नीति तैयार की गई थी। हालांकि, कानूनी पेचीदगियों और आपत्तियों के चलते मामला अदालत पहुंच गया।

ये पड़ रहा प्रभाव

सरप्लस शिक्षकों वाले विद्यालयों से जरूरतमंद और शिक्षकविहीन स्कूलों में तैनाती नहीं हो पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के मलिहाबाद, सरोजनीनगर और मोहनलालगंज के दूर-दराज के विद्यालयों में स्थिति अधिक गंभीर है।

नगर क्षेत्र के 30 जूनियर विद्यालयों में विषय शिक्षक नहीं

नगर क्षेत्र के चारों जोन में 204 सरकारी विद्यालय हैं। इनमें करीब 30 जूनियर विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की कमी है। कक्षा छह से आठ तक के कई स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के शिक्षक नहीं हैं। करीब 65 प्राथमिक विद्यालयों में एक शिक्षक और एक शिक्षामित्र के सहारे पढ़ाई चल रही है। करीब एक दर्जन विद्यालयों में शिक्षामित्र या कार्यवाहक शिक्षक व्यवस्था संभाल रहे हैं।

यहां बच्चे ज्यादा शिक्षक कम

फतेहगंज प्राथमिक स्कूल: 60 बच्चे, एक शिक्षक

जूनियर हाईस्कूल गाजीपुर बलराम: 138 बच्चे, एक शिक्षक

बेसिक स्कूल अंबेडकरनगर: 66 बच्चे, एक शिक्षक

बेसिक स्कूल भरावन कला: 80 बच्चे, एक शिक्षक

प्राथमिक स्कूल पलटन: 150 बच्चे, दो शिक्षक

बच्चों की संख्या के मुकाबले शिक्षक अधिक

बेसिक स्कूल जियामऊ : 114 बच्चों पर पांच शिक्षक

बेसिक स्कूल हैबतमऊ : 62 बच्चों पर चार शिक्षक

बेसिक स्कूल लाहौरगंज : 50 बच्चों पर चार शिक्षक

बेसिक स्कूल पुलगामा : 48 बच्चों पर चार शिक्षक

बेसिक स्कूल छितवापुर : 30 बच्चों पर तीन शिक्षक


यहां शिक्षक हीं नहीं

प्राथमिक स्कूल कैबिनेटगंज : 43 बच्चे, शिक्षक 0

जूनियर हाईस्कूल भूहर : 64 बच्चे शिक्षक 0

उच्च प्राथमिक स्कूल गहरू : 10 बच्चे, शिक्षक 0

जूनियर स्कूल माधवपुर : 87 बच्चे, शिक्षक 0

प्राथमिक स्कूल तकरोही प्रथम : 157 बच्चे, शिक्षक 0

शिक्षकों के समायोजन का मामला कोर्ट में चल रहा है। निर्णय आने के बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरप्लस शिक्षकों का समायोजन होने पर करीब 90 फीसदी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात सुधर जाएगा। – विपिन कुमार, बीएसए

विभाग की सुस्ती और कानूनी उलझनों का खामियाजा गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। ये बच्चे सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर हैं। -सुधांशु मोहन, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट



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