लखनऊ के मोहनलालगंज में घर का यश… मां का दुलारा… पिता का सहारा… अपना आंगन सूना कर गया। परिवार को जिंदगीभर का सदमा दे गया। साइबर जालसाजों ने उसकी मासूमियत को ऐसा छला कि उसे जान देने के लिए मजबूर होना पड़ा। मासूम यश की मौत से उसका गांव ही नहीं, पूरा जिला सदमे में है।
पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार शाम को उसका शव गांव पहुंचा तो हर कोई आखिरी बार उसे दुलारने के लिए टूट पड़ा। बेबस पिता इकलौते बेटे के शव को एकटक निहारते रहे। मां विमला की हालत बयां करने के लिए शब्द हल्के पड़ रहे हैं। वह जब भी होश में आतीं, बेटे के शव से लिपट जातीं।
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यश का फाइल फोटो
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लखनऊ के मोहनलालगंज में घर का यश… मां का दुलारा… पिता का सहारा… अपना आंगन सूना कर गया। परिवार को जिंदगीभर का सदमा दे गया। साइबर जालसाजों ने उसकी मासूमियत को ऐसा छला कि उसे जान देने के लिए मजबूर होना पड़ा। मासूम यश की मौत से उसका गांव ही नहीं, पूरा जिला सदमे में है।
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यश का शव देख विलाप करतीं मां विमला देवी और अन्य
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार शाम को उसका शव गांव पहुंचा तो हर कोई आखिरी बार उसे दुलारने के लिए टूट पड़ा। बेबस पिता इकलौते बेटे के शव को एकटक निहारते रहे। मां विमला की हालत बयां करने के लिए शब्द हल्के पड़ रहे हैं। वह जब भी होश में आतीं, बेटे के शव से लिपट जातीं।
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यश का शव देख विलाप करतीं मां विमला देवी
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दोस्तों से बोला था यश- हो सकता है अब न आ पाऊं
सोमवार को स्कूल से निकलते वक्त यश काफी उदास था। दोस्तों के पूछने पर उसने कहा था कि हो सकता है कि कल से मैं स्कूल न आ पाऊं। दोस्तों ने उसकी बात को मजाक समझकर टाल दिया था। यश के दोस्तों का कहना है कि अगर उन्हें पता होता कि उनका दोस्त जान दे देगा तो उसके घरवालों को पूरे मामले की जानकारी दे देते।
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यश खुदकुशी मामले की जांच करती पुलिस और उसके पिता सुरेश
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10 माह से लगातार हो रहे थे ट्रांजेक्शन
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि बैंक की ओर भी छानबीन चल रही है। सामने आया है कि 10 माह से लगातार सुरेश के खाते से ऑनलाइन लेनदेन हो रहा था। शायद यह ऑनलाइन गेम में लगाई गई रकम का ही लेनदेन है। कई बार खाते में रकम आई भी है।