कभी घर की चौखट और चूल्हा-चौका तक सीमित मानी जाने वाली महिलाएं अब गांव की तस्वीर और तकदीर बदलने में भूमिका निभा रही हैं। महिलाएं सिर्फ प्रतिनिधि नहीं, बल्कि विकास की दिशा तय करने वाली मजबूत मुखिया बनकर उभरी हैं। पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर वे न सिर्फ योजनाएं बना रही हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर मिसाल भी कायम कर रही हैं। इसलिए इनको मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक ने सम्मानित किया है। पंचायती राज दिवस विशेष पर ये महिला प्रधान सिर्फ नाम ही नहीं, बल्कि उस सामाजिक बदलाव की उदाहरण हैं, जहां महिलाएं सीमाएं तोड़कर नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ रही हैं।
