यूपी के सियासी गलियारों की तरह विभागों में भी हलचल मची रहती है। कहीं पर तबादले के बाद हालात बदल जाते हैं तो कहीं रार छिड़ गई है। दो मामलों में तो ऐसा ही हुआ है। वहीं, तीन विभागों के अधिकारियों की सक्रियता बड़ी चर्चा में है। पढ़ें, ये किस्से:
ट्रांसफर पर कहीं खुशी, कहीं गम
शहर के प्रमुख स्टेडियम में तैनात कोच साहब राजधानी में लंबे प्रवास के बाद आखिरकार विदा हो गए। एक सरकारी स्टेडियम का अतिरिक्त चार्ज संभालने वाले कोच साहब के रवैये को लेकर खेल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने खुलकर विरोध किया। एक बार तो मारपीट का विवाद पुलिस चौकी तक भी पहुंच गया। विभाग की ट्रांसफर लिस्ट में उनका नाम आने से विरोध करने वाले तो बहुत खुश हो गए लेकिन कामकाज के संचालन को लेकर संकट गहरा गया है। दरअसल, वह तो विदा हो गए लेकिन किसी दूसरे को उनकी जगह नहीं भेजा गया।
तबादले पर छिड़ी रार
सेहत से जुड़े विभाग में तबादले पर रार छिड़ी हुई है। कोई प्रधानाचार्य पर सवाल उठा रहा है तो कोई शिक्षकों पर। अस्पताल वाले तो सबसे आगे हैं। निदेशक बनने की दौड़ में शामिल आयुष चिकित्सा अधिकारियों ने तो सार्वजनिक रूप से चिट्ठी लिख मारी है। कुछ की जांच भी शुरू हो गई है। अब देखना यह है कि जांच किस दिशा में जाती है क्योंकि धुंआ उठा है तो कही न कहीं चिंगारी होगी ही।
जल्दी का काम….
सरकार का मूड देख विभाग चौकन्ना हैं। तीन विभाग तो जैसे एनर्जी ड्रिंक लेकर पूरी स्फूर्ति से काम कर रहे हैं। चार साहब तो जैसे सोते ही नहीं हैं। चर्चा चौतरफा है कि आखिर इतनी तेजी की वजह क्या है? काम का बोझ या नंबर बढ़ाने की प्रतियोगिता। उन्हें देख उनके विभाग में खुसफुसाहट है कि काम तो है लेकिन ऊपर ज्यादा है। थोड़ा नीचे वालों का भी ख्याल रखा जाए तो काम के बोझ का बंटवारा बराबरी से हो जाए।
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