ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और विस्तार के लिए हो रहे सर्वे में पेड़ों की भी जांच की जाएगी। यदि पेड़ लगे मिले तो उन्हें काटने या हटाने के लिए भी केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) से अनुमति लेनी पड़ेगी। जिलास्तरीय कमेटी के सर्वे के बाद भी उद्योगों पर अंतिम निर्णय सीईसी और नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) की सहमति जरूरी होगी।

ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए बने टीटीजेड में अक्तूबर 2024 से नए उद्योग लगाने पर रोक है। पुराने उद्योगों का विस्तार भी नहीं हो सकता। ऐसे में 23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने 410 एमएसएमई इकाइयों की स्थापना एवं विस्तार के लिए आवेदनों की स्क्रीनिंग के आदेश दिए हैं। स्क्रीनिंग के लिए टीटीजेड अध्यक्ष, नीरी और सीईसी की कमेटी गठित की गई है। जिला स्तर पर सर्वे शुरू हो गया है।

पहले चरण में 208 इकाइयों का सर्वे किया जा रहा है। इनमें 54 ऐसी इकाइयां भी शामिल हैं, जो पूर्व से स्थापित हैं। विद्युत भार बढ़ाना चाहती हैं। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक शैलेंद्र सिंह ने बताया कि सर्वे के बाद टीम अपनी रिपोर्ट टीटीजेड प्राधिकरण को सौंपेंगी। अंतिम निर्णय प्राधिकरण स्तर से होगा। उन्होंने बताया कि इकाइयों में पेड़ों का सत्यापन भी किया जा रहा है। ऐसी इकाइयों की अलग से सूची बनेगी।

मास्टर प्लान से तय होगा भू उपयोग

 टीटीजेड अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप ने नई इकाइयों के आवेदनों में भू उपयोग और प्रदूषण स्कोर की जांच को अनिवार्य किया है। इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। इकाइयों का भू उपयोग मास्टर प्लान 2031 से तय होगा। कृषि भूमि पर भी सूक्ष्म उद्योगों को अनुमति मिलेगी। अन्य उद्योगों को सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र में ही अनुमन्य किया जाएगा।

 



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