ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और पॉवर कॉर्पोरेशन के बीच अंदरखाने चल रही अनबन बृहस्पतिवार को खुलकर सामने आ गई। ऊर्जा मंत्री ने पॉवर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डा. आशीष कुमार गोयल पर पत्र लिखकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मंत्री ने कहा है कि गर्मी में कई विद्युत कर्मियों ने निष्ठापूर्वक कार्य किया है, लेकिन कुछ कर्मियों ने लापरवाही कर सरकार को बदनाम किया। ऐसे कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। वर्तमान ट्रांसफर सीजन में इनका यथायोग्य तबादला किया जाए। इस बारे में उन्हें भी जानकारी दें।
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बिना बताए बाहर जाने पर जताई आपत्ति
पत्र में लिखा है कि मई में आंधी तूफान के कारण विद्युत अवसंरचना बुरी तरह प्रभावित हुई है। 30 मई की समीक्षा बैठक में पता चला कि ऐसी चुनौतीपूर्ण समय में आप मुख्यालय से बाहर हैं। आगे भी तीन दिन बाहर रहेंगे। आग्रह करने पर ऑनलाइन बैठक हुई। किसी भी उच्चअधिकारी का यह व्यवहार जनहित के विपरीत एवं गैरजिम्मेदाराना है। भविष्य में मुख्यालय छोड़ने से पहले मुझे अवगत कराया जाए।
जब प्रबंधन मंत्री की नहीं सुन रहा तो किसकी सुनेगा : वर्मा
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ईंधन अधिभार शुल्क वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। कहा, जब पॉवर कॉर्पोरेशन ऊर्जा मंत्री और नियामक आयोग का नहीं सुन रहा है तो किसकी सुनेगा? उन्होंने पूरे मामले में सीएम योगी से हस्तक्षेप करने और उपभोक्ताओं को राहत दिलाने की मांग की है। वर्मा ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जून में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क लगाना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। अब ऊर्जा मंत्री ने भी यह कहा जाना कि उन्हें इस निर्णय की जानकारी सोशल मीडिया मिली। इस विषय पर उनसे कोई राय नहीं ली गई यह अत्यंत गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कहा कि उन्होंने गर्मी शुरू होने से पहले ही चेतावनी दी थी कि वर्टिकल व्यवस्था विफल हो रही है। संविदा कार्मिकों की कमी के कारण बिजली आपूर्ति एवं अनुरक्षण व्यवस्था प्रभावित होगी। फिर भी कार्पोरेशन प्रबंधन ने नहीं सुना। पावर कॉरपोरेशन में लगातार मनमाने ढंग से फैसले लिए जाते रहे हैं।
तीन साल से लंबित हैं मंत्री के निर्देश : समिति
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बृहस्पतिवार को पॉवर कॉर्पोरेशन अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल को ज्ञापन सौंपा। समिति ने मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां तत्काल वापस लेने की मांग की। ज्ञापन में बताया गया है कि ऊर्जा मंत्री के निर्देशों का तीन साल बाद भी पालन नहीं हुआ है। संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा निगमों में सकारात्मक कार्य वातावरण के लिए लंबित दंडात्मक कार्रवाइयां खत्म करना आवश्यक है। कार्रवाइयां खत्म होने से बिजली कर्मियों में भारी असंतोष है। ज्ञापन देने वालों में जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद, दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी, केएस रावत और आरसी पाल शामिल थे।
