आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग करने वाले अभिषेक मिश्रा ने मुंबई की 21 लाख रुपये सालाना नौकरी छोड़कर राधाकुंड में आध्यात्मिक गुरु का रूप धारण कर लिया। अब उस पर युवतियों को बहलाने, शोषण करने और भक्ति की आड़ में नेटवर्क चलाने के आरोपों की जांच चल रही है।

आईआईटियन अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास ने भक्ति की आड़ में अपराध का ऐसा रास्ता चुना जिसने सबको चौंका दिया। मुंबई में 21 लाख रुपये का सालाना पैकेज छोड़ राधाकुंड के आश्रम में युवतियों के साथ दुष्कर्म व गंधर्व विवाह कराने का जाल बिछाया। एक पीड़िता की शिकायत के बाद राजफाश हो गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

 




IITian Turned Self-Styled Guru: How He Allegedly Trapped Educated Women

आईआईटियन बाबा अभिषेक मिश्रा
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


रसूख के लिए दो लठैतों को रखता था आईआईटियन बाबा

अध्यात्म और ज्ञान की आड़ में अनैतिक रैकेट चलाने वाले आईआईटियन बाबा अभिषेक उर्फ आदिकर्ता नारायण दास के काले कारनामों की परतें अब धीरे-धीरे खुलती जा रही हैं। पुलिस की जांच में पता चला है कि खुद को श्रीकृष्ण का अवतार बताने वाला बाबा रसूख और खौफ बनाने के लठैतों को साथ रखता था। पुलिस इन लठैतों के साथ बाबा के करीबियों की भी तलाश में जुटी है।


IITian Turned Self-Styled Guru: How He Allegedly Trapped Educated Women

आईआईटियन बाबा अभिषेक मिश्रा
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


ये था लठैतों का काम 

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह लठैत न सिर्फ बाबा को सुरक्षा घेरा देते थे, बल्कि आश्रम के भीतर उसकी मर्जी के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवक-युवतियों को डराने-धमकाने का काम भी करते थे। फिलहाल पुलिस बाबा के इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है और उसके बेहद करीबी सहयोगियों की तलाश की जा रही है, जो इस रैकेट को संचालित करने में साथ दे रहे थे। पुलिस ने बाबा के ठिकाने से उसका लैपटॉप बरामद किया है। अधिकारियों का मानना है कि लैपटॉप की गहन जांच और डेटा रिकवरी से इस रैकेट के वित्तीय लेन-देन, देश-विदेश से जुड़े संपर्कों और ऑनलाइन जूम मीट के जरिए फंसाए गए अन्य शिकार युवक-युवतियों के राज खुलेंगे।

 


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आईआईटियन बाबा अभिषेक मिश्रा
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


2021 में आईआईटी रुड़की से की थी मैकेनिकल इंजीनियरिंग

मूल रूप से ओडिशा के भुवनेश्वर (थाना खंडगिरी क्षेत्र) स्थित आईगिनिया अपार्टमेंट के रहने वाले अभिषेक मिश्रा ने साल 2021 में आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक साल 2023 में मुंबई की संस्थान में 21 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी करने लगा। अभिषेक की मां एक सरकारी स्कूल में प्रधानाध्यापिका थीं, जो सेवानिवृत्त होने के बाद साल 2022 में भक्ति करने के उद्देश्य से राधाकुंड आ गईं। बीच बीच में अभिषेक भी मां से मिलने यहां आता रहा। उसका मन यहीं रमने लगा। शुरू में वह केवल अध्यात्म की ओर ही बढ़ा था। करीब एक साल तक नौकरी करने के बाद अभिषेक का मन पूरी तरह बदल गया और वह मोटी तनख्वाह का पैकेज छोड़कर राधाकुंड अपनी मां के पास आ गया। 

 


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आईआईटियन बाबा अभिषेक मिश्रा
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इसलिए मां वापस लौट गई ओडिशा

कुछ ही दिनों बाद मुंबई में साथ काम करने वाली युवती भी उसके पास राधाकुंड आ गई। अभिषेक की मां ने युवती के आने का विरोध किया तो विवाद हो गया। पारिवारिक कलह और बेटे की हरकतों से परेशान होकर मां वापस ओडिशा लौट गईं। इसके बाद अभिषेक ने पूरी तरह से भक्ति का चोला ओढ़ लिया। अपना नाम बदलकर आदिकर्ता नारायण दास रखा और राधाकुंड की पावन धरा पर काले कारनामे शुरू कर दिए।




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