उरई। मनरेगा के तहत फरवरी-मार्च 2026 में कराए गए कामों को कागजों पर दिखा कर 27.04 लाख रुपये का गबन किया गया है। यह पूरा खेल महतवानी, बदउन्वा और धंजा पंचायतों में जांच के बाद पकड़ गया है। मामले में तत्कालीन दो सचिवों को निलंबित कर दिया गया है और पूरी रकम की रिकवरी के आदेश दिए गए हैं।

महतवानी में चार बांधों पर 21.84 लाख का भुगतान

महतवानी ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत चार बांध निर्माण कार्य कराए जाने के नाम पर 21,84,320 रुपये का भुगतान किया गया। इनमें चंद्रपाल के खेत से सुनील के खेत तक, कुलदीप के खेत से भगवान सिंह के खेत तक, रोड से टिंकू के खेत तक और महेंद्र के खेत से शिवकांति के खेत तक बांध निर्माण शामिल था। जांच में इन चारों कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितता सामने आई। जांच अधिकारियों के मुताबिक कार्यों का मौके पर कराया जाना पुष्ट नहीं हो सका। इसके बावजूद अभिलेखों में काम पूरा दर्शाकर भुगतान किया गया।

माप के बाद 59 श्रमिकों को 1.75 लाख भुगतान

महतवानी में ही भदवां वाली के खेत से शिवकांति के खेत तक बांध निर्माण में भी गड़बड़ी सामने आई। जांच में पाया गया कि कार्य की माप दर्ज होने की तारीख के बाद 59 श्रमिकों को 1,75,490 रुपये का भुगतान किया गया। यानी जिस अवधि में भुगतान दिखाया गया, उस पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

चार बांधों के 21.84 लाख रुपये और इस भुगतान को मिलाकर 23,59,841 रुपये की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं। यह राशि तत्कालीन सचिव, ग्राम प्रधान, तकनीकी सहायक, अवर अभियंता आदि से नियमानुसार वसूल किए जाने के निर्देश हैं।

इस प्रकरण में तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव रोहित कुमार, जो वर्तमान में विकासखंड कदौरा में ग्राम विकास अधिकारी के पद पर तैनात हैं को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग, गंभीर वित्तीय अनियमितता और दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही के आरोप में अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है। प्रकरण की जांच के लिए खंड विकास अधिकारी डकोर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें आरोपपत्र तैयार कर निर्धारित समय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

बदउन्वा में तीन संपर्क मार्ग भी नहीं मिले

बदउन्वा ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत तीन संपर्क मार्ग स्वीकृत किए गए थे। इनमें सीताराम के खेत से खोया मेढ़े तक, देवसिंह के खेत से कमलेश के खेत तक और अजय सिंह के खेत से नारायणदास के खेत तक संपर्क मार्ग शामिल थे। उपायुक्त श्रम रोजगार की स्थलीय जांच में तीनों स्थानों पर कार्य कराया हुआ नहीं मिला। इसके बावजूद मस्टर रोल जारी किए गए और एनएमएमएस एप के जरिए श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की गई।

जांच में एनएमएमएस एप पर एक ही फोटो को बार-बार इस्तेमाल कर श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने की बात सामने आई। फर्जी फोटो के माध्यम से हाजिरी दर्ज कर भुगतान लेने के उद्देश्य से अभिलेखीय कार्रवाई किए जाने को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया। इस मामले में तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी/सचिव प्रशांत सुभाष दूबे प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करते हुए निलंबन किया गया है।

धंजा में इंटरलॉकिंग का काम भी गायब

धंजा ग्राम पंचायत में एक व्यक्ति के मकान से कालका के मकान तक प्रस्तावित इंटरलॉकिंग कार्य की जांच की गई तो मौके पर काम मिला ही नहीं। जांच टीम के सामने ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान भी कार्य से संबंधित पुष्टिकारक अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके। इस प्रकरण में 3,44,245.98 रुपये की वसूली सचिव, तकनीकी सहायक और ग्राम प्रधान आदि से किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

उठ रहे निगरानी व्यवस्था पर सवाल

तीनों ग्राम पंचायतों के मामलों में जांच के बाद सरकारी धन की वसूली के साथ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कार्य मौके पर नहीं थे तो उनके मस्टर रोल कैसे जारी हुए, एनएमएमएस पर श्रमिकों की तस्वीरें कैसे अपलोड हुईं और भुगतान से पहले जिम्मेदार अधिकारियों ने स्थलीय सत्यापन कैसे किया। अब कार्रवाई के बाद यह भी देखना होगा कि वसूली की रकम सरकारी खाते में कब तक जमा होती है और इस पूरे खेल में अन्य स्तरों पर किसकी भूमिका सामने आती है।

वर्जन

जांच के बाद कार्यों में गड़बड़ी मिलने पर दोनों सचिवों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। जांच चल रही है, जांच के बाद अन्य कार्रवाई की जाएगी। – निशांत पांडेय, डीडीओ



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