कथा वाचक मनोज भोडले की पिता ओमप्रकाश भोडले से फोन पर बात हुई थी। उस दौरान उन्होंने कहा था- पापा, दोपहर तक घर पहुंच जाऊंगा। परिवार उनके इंतजार में बैठा रहा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। दोपहर तक लौटने का वादा करने वाला बेटा कभी घर नहीं पहुंच सका। घर में हर कोई बस यही कहता नजर आ रहा है- काश वह फोन कॉल आखिरी न होती।
रात 11 बजे भाई से हुई थी बात, सुबह हादसे ने छीन ली जिंदगी
कालपी में हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले देशराज की आखिरी बातचीत भी अब परिवार के लिए दर्द बन गई है। बताया गया कि रविवार रात करीब 11 बजे देशराज की अपने भाई लक्ष्मी प्रसाद से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने बताया था कि अयोध्या में प्रतिमा विसर्जन हो चुका है और कुछ ही देर में सभी लोग वापस लौट रहे हैं। परिजनों को क्या पता था कि यह बातचीत आखिरी साबित होगी।
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मृतक कथा वाचक मनोज भोडले की फाइल फोटो
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पेट्रोल पंप से पुलिस ने पकड़ा डंपर
कालपी क्षेत्र में हुए सड़क हादसे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डंपर चालक को पकड़ लिया है। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद चालक वाहन लेकर भाग गया था। पुलिस ने तलाश शुरू की और कुछ ही समय में एक पेट्रोल पंप के पास डंपर को पकड़ लिया।
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मृतक देशराज नामदेव की फाइल फोटो
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वाहन को कब्जे में लेकर पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद डंपर में लगा बंपर टूट गया था। इसके बाद चालक ने डंपर को पेट्रोल पंप पर खड़ा कर दिया था। वह करीब दो घंटे तक वहां खड़ा रहा, लेकिन जैसे ही वह आगे बढ़ा तो पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
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मृतक कृष्णकांत नायक की फाइल फोटो
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फिर दोहराया इतिहास: तेज रफ्तार और झपकी ने लील लीं जिंदगियां
जालौन और आसपास के क्षेत्रों में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया हादसे के बाद एक बार फिर पुराने हादसे लोगों को याद आ गए हैं। 7 मई 2025 को भी झांसी-कानपुर हाईवे पर एक भीषण हादसा हुआ था, जब तेज रफ्तार कार चला रहे डॉक्टर को झपकी आ गई थी।
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मौके पर जमा लोग
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कार डिवाइडर से टकराकर दूसरी लेन में पहुंच गई और सामने से आ रहे ट्रक से भिड़ गई। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार और झपकी सड़क हादसों के सबसे बड़े कारण बनते जा रहे हैं। ताजा हादसे में भी लोगों के बीच यही चर्चा है कि अगर सावधानी बरती जाती, तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।