बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव ने 26 अधिवक्ताओं के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। यह प्राथमिकी बार काउंसिल के सचिव आरके शुक्ला की शिकायत पर दर्ज की गई है। आरोप है कि यह लोग फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र लगाकर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद वकालत कर रहे थे। सत्यापन में पोल खुलने के बाद सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। 

 

एफआईआर के मुताबिक मामला हाईकोर्ट के आदेश से जुड़ा है। तहरीर में कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दायर एक याचिका कफील बनाम स्टेट ऑफ यूपी व अन्य मामले में तीन जून 2026 को आदेश पारित किया था। आदेश के पैरा संख्या 108 में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकृत एक अधिवक्ता की डिग्री को सत्यापित कराए जाने के दौरान फर्जी पाए जाने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था।

 

तहरीर में आरोप लगाया गया है कि लखनऊ के रहने वाले एक अधिवक्ता ने लखनऊ ने वर्ष 2013 की स्नातक डिग्री/अंकपत्र अपने अधिवक्ता सीओपी आवेदन पत्र के साथ लगाया था। सत्यापन के लिए दस्तावेज श्रीधर विश्वविद्यालय, पिलानी, राजस्थान भेजे गए थे। विश्वविद्यालय से प्राप्त रिपोर्ट में अंकपत्र की छायाप्रति को अभिलेखों के अनुसार गलत एवं असत्य बताया गया है।

रिपोर्ट पर 18 अप्रैल 2024 की तारीख अंकित होने का भी उल्लेख एफआईआर में है। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिवक्ता को छह मई 2024 को समिति की ओर से नोटिस भेजा गया था। इसके बाद एफआईआर दर्ज कराई गई। इसी तरह 25 अन्य अधिवक्ताओं के  खिलाफ फर्जी डिग्री लगाकर वकालत करने की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरके शुक्ला ने बताया कि 100 लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई है, जिनके अंकपत्र और डिग्री फर्जी मिले हैं। 



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