Muzaffarnagar जनपद में आर्थिक अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत मुजफ्फरनगर पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने कथित तौर पर यूट्यूब से ठगी के तरीके सीखकर फर्जी कंपनियों का नेटवर्क खड़ा किया और निवेश के नाम पर लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। पुलिस ने गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार आरोपी लोगों को भारी मुनाफे और विभिन्न परियोजनाओं में हिस्सेदारी का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।


निवेश पर 10 से 12 प्रतिशत मासिक मुनाफे का दिया जाता था झांसा

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को निवेश के बदले 10 से 12 प्रतिशत मासिक रिटर्न देने का दावा करते थे। इसके अलावा विभिन्न परियोजनाओं में 60 प्रतिशत तक हिस्सेदारी का लालच देकर निवेशकों का विश्वास जीतने की कोशिश की जाती थी।

आरोपी आकर्षक योजनाओं और बड़े मुनाफे का सपना दिखाकर लोगों से लाखों रुपये नकद और ऑनलाइन माध्यम से अपने खातों में ट्रांसफर कराते थे।


थाना नई मंडी पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

यह कार्रवाई थाना नई मंडी क्षेत्र में चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान की गई। पुलिस ने जानसठ फ्लाईओवर के नीचे से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई—

  • हरेन्द्र मलीया पुत्र रणजीत सिंह, निवासी बेगराजपुर।
  • दीपक चौधरी पुत्र मलीराम, निवासी गांधी कॉलोनी, थाना नई मंडी।
  • प्रवीन कुमार पुत्र हुकुमचंद, निवासी आर्यपुरी शेखपुर, जनपद मुजफ्फरनगर।

तीनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं।


फर्जी कंपनियां बनाकर तैयार किए जाते थे नकली दस्तावेज

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने Global Tech Realty तथा एक अन्य फर्जी कंपनी के नाम से दस्तावेज तैयार कर निवेश का जाल बिछाया था।

इन कंपनियों के नाम पर कथित इकरारनामे, अनुबंध और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे, ताकि निवेशकों को यह विश्वास दिलाया जा सके कि उनका पैसा सुरक्षित परियोजनाओं में लगाया जा रहा है।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को ऐसे कई दस्तावेज मिले हैं, जिनकी सत्यता की जांच की जा रही है।


यूट्यूब से सीखे ठगी के नए तरीके

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने इंटरनेट और विशेष रूप से यूट्यूब वीडियो देखकर विभिन्न प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी और लोगों को झांसे में लेने के तरीके सीखे।

इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से फर्जी कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया गया और निवेशकों को आकर्षक योजनाओं के नाम पर निशाना बनाया गया।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी कब से इस गतिविधि में शामिल थे और किन-किन राज्यों या जिलों तक उनका नेटवर्क फैला हुआ था।


मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने—

  • तीन मोबाइल फोन
  • फर्जी कंपनियों से संबंधित दस्तावेज
  • अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और साक्ष्य

बरामद किए हैं।

पुलिस इन मोबाइल फोन और दस्तावेजों की डिजिटल जांच भी कर रही है, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों तथा वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाई जा सके।


कितने लोगों से हुई ठगी, जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कुल कितनी धनराशि की धोखाधड़ी की गई।

साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह के अन्य सदस्य कौन हैं और क्या इस नेटवर्क के तार अन्य जिलों या राज्यों से भी जुड़े हुए हैं।

यदि जांच में अन्य पीड़ितों की जानकारी सामने आती है तो मामले में और धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।


आर्थिक अपराधियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आर्थिक अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे गिरोहों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और जांच के दौरान सामने आने वाले प्रत्येक आरोपी के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित कंपनी की वैधता की पूरी जांच करें। अवास्तविक मुनाफे का लालच देने वाली योजनाओं से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।


निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश के नाम पर धोखाधड़ी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में नागरिकों को—

  • बिना सत्यापन किसी कंपनी में निवेश न करने,
  • असामान्य रूप से अधिक रिटर्न के दावों से सतर्क रहने,
  • आधिकारिक दस्तावेजों और पंजीकरण की जांच करने,
  • तथा केवल अधिकृत वित्तीय संस्थानों के माध्यम से निवेश करने की सलाह दी जाती है।

इस प्रकार की सतर्कता आर्थिक अपराधों से बचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों से कथित रूप से धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का खुलासा आर्थिक अपराधों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और पुलिस उनके नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन तथा संभावित अन्य पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही धोखाधड़ी की वास्तविक राशि और पूरे नेटवर्क की विस्तृत तस्वीर सामने आ सकेगी।

 



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