आगरा में सड़क हादसों की दर लगातार बढ़ रही है। इसमें मौत हो रही हैं और युवाओं के हाथ-पैर टूट रहे हैं। चार सूत्री योजना से इनको रोका जा सकता है। एसएन मेडिकल कॉलेज में भारतीय सड़कों पर मृत्यु दर का खतरनाक रुझान विषय पर संगोष्ठी करते हुए वक्ताओं ने विचार रखे।

मुख्य वक्ता बाल रोग सर्जन और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने कहा कि हादसों में आगरा छठे स्थान पर है। यहां गंभीर हादसों में पांच घायलों में से औसतन दो से अधिक मौत हो रही हैं। इसकी वजह आगरा के आसपास कई एक्सप्रेस वे का भी होना है। उन्होंने इससे बचाव के लिए बेहतर रोड, यातायात नियम और चिकित्सकीय संसाधनों पर जोर दिया।

विशिष्ट अतिथि अपर पुलिस उपायुक्त यातायात अलका ने कहा कि दुनिया भर में सड़क हादसों में जान गंवाने वाला सात में से एक भारतीय है। इससे बचाव के लिए बेहतर सड़क, साइनेज हों। यातायात नियमों की स्कूल स्तर से जानकारी, सख्ती से पालन और हादसे के बाद तत्काल चिकित्सकीय सेवा से इन पर रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने पीएम राहत योजना के तहत मिलने वाले 2.5 लाख रुपये के मुफ्त इलाज के बारे में भी बताया।

सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा कि हादसों में युवाओं की संख्या अधिक है, जिसमें हाथ-पैर के अलावा मल्टीपल फ्रैक्चर मिल रहे हैं। सड़कों पर वाहन खड़े कर देना, वाहन खराब होने पर खड़े रहने से भी बड़े हादसे हो रहे हैं। इसका भी समाधान जरूरी है।

संचालन डॉ. करन रावत ने किया। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने सभी का आभार जताया। कार्यक्रम में उप प्राचार्य डॉ. टीपी सिंह, डॉ. अरुण राठौर, डॉ. जेपीएस शाक्य, डॉ. अनुभव गोयल, डॉ. मयंक अग्रवाल, डॉ. गौरव धाकरे, डॉ. तरुणेश शर्मा, डॉ. अतिहर्ष मोहन, डॉ. योगिता, डॉ. अलका यादव, डॉ. सीपी गौतम, डॉ. गीतू सिंह, डॉ. प्रीति भारद्वाज आदि मौजूद रहे।

 



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