गणेश चतुर्थी पर्व की तैयारियां शहर में जोरों पर हैं। मूर्तिकार भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। भगवान गणेश 14 सितंबर को विराजेंगे। मुंबई के लाल बाग के राजा की तर्ज पर बनी झांसी के लाल बाग के राजा की मूर्ति शेर के सिंहासन पर विराजमान होगी, जो आकर्षण का केंद्र होगी।
गल्ला मंडी रोड पर मूर्तिकार जितेंद्र कुशवाहा और उनके दो दर्जन से अधिक साथी होली के बाद से ही प्रतिमाएं बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 6,500 रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं। मूर्तियों के दाम बढ़ने का मुख्य कारण सुतली, घास, पटिया, टाट और रंगों जैसी सामग्री का महंगा होना है।
जितेंद्र ने यह भी बताया कि इन प्रतिमाओं में उच्च गुणवत्ता वाले और गलने वाले रंगों का ही प्रयोग किया जाता है। हाल ही में हुई बारिश से काम की गति धीमी पड़ गई थी। अब बरसात थमने के बाद लगभग 100 मूर्तियों में पुट्टी लगाने का काम तेजी से चल रहा है। सभी मूर्तियां 11 से 12 सितंबर तक पूरी तरह तैयार कर ली जाएंगी। महंगाई के चलते जितेंद्र केवल ऑर्डर पर ही मूर्तियां बनाते हैं। उनके पास झांसी के अलावा दतिया, बबीना और बरुआसागर जैसे आसपास के क्षेत्रों से भी ऑर्डर आते हैं।
पूजन सामग्री विक्रेताओं में उत्साह
भगवान गणेश के आगमन को लेकर पूजन सामग्री बेचने वाले व्यवसायी भी उत्साहित हैं। बर्तन व्यवसायी कलश और थाली जैसे सामान से अपनी दुकानें सजा रहे हैं। मोदक बनाने वाले मिठाई विक्रेता और किराना दुकानदार भी तैयारी में हैं। पोशाक और फूल बेचने वाले भी इस पर्व को लेकर आशावान हैं।
अन्य स्थानों पर भी प्रतिमा निर्माण
जितेंद्र कुशवाहा के बाड़े के अलावा महानगर में कई अन्य स्थानों पर भी गणेश प्रतिमाएं बन रही हैं। नए बस स्टैंड रोड, हंसारी और पहूज रोड पर भी मूर्तिकार प्रतिमाओं को आकार दे रहे हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि प्रतिमाएं बनाते समय उनमें एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। यह उत्साह उन्हें समय पर मूर्तियां तैयार करने में मदद करता है।
