पसंदीदा जॉब है और न ही मनमाफिक रुपये, उस पर काम का भारी दबाव। टार्गेट पूरा करने की बंदिश में परिवार के लिए भी समय नहीं मिल पा रहा है। इन स्थितियों से युवा तनाव में आ रहे हैं। लंबे समय तक यही स्थितियां व्यवहार में चिड़चिड़ापन लाती हैं। नौकरी-घर के झंझावतों और हालात का गुस्सा अपनों (माता-पिता, पत्नी और बच्चों) पर निकल रहा है। इससे पारिवारिक संबंध के साथ काम भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे मरीज मानसिक रोग विशेषज्ञों से काउसिलिंग कराने आ रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के टेलीमानस 14416 पर रोजाना काउंसिलिंग के लिए औसतन 350 फोन आ रहे हैं। ये 24 घंटे संचालित सेवा है। इसमें करीब 40 फीसदी मामलों कामकाजी युवाओं से जुड़े हैं। इसमें मनमाफिक नौकरी, योग्यता-काम के अनुसार कम पैकेज, कार्य के घंटे अधिक होना और सामाजिक जरूरतों को पूरा करने में कमी होने पर तनाव के मामले हैं। अधिकांश की उम्र 30-45 साल है। इससे स्वभाव बदलने पर जल्दी गुस्सा आना, नीरसता, एकाकीपन होने लगता है। तनाव गंभीर स्थिति में पहुंचने पर पत्नी-बच्चों और परिजन से तेज आवाज में बात करना, झगड़ा होने लगता है। लिहाजा रिश्ते खराब होने लगते हैं। इसका असर फिर पीड़ित के काम पर भी पड़ रहा है। ये अस्थायी परेशानी है, इनको काउंसिलिंग के साथ जरूरत पर अस्पताल बुलाकर दवाएं भी देते हैं, जिससे सुधार होता है।
कॅरियर, जॉब, कार्य का दबाव से तनाव में युवा
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश राठौर का कहना है कि युवाओं में कॅरियर, जॉब, घरेलू विवाद, कार्य का दबाव के चलते तनाव में हैं। टेलीमानस पर इससे पीड़ितों की संख्या 40 फीसदी है। ये अस्थायी समस्या है, इलाज-काउंसिलिंग से ठीक हो रही है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति अवसाद की वजह बनती है। ऐसे में ज्यादा दिन तनाव में होने पर जल्द से जल्द काउंसिलिंग कराएं।
केमिकल बदलाव से बढ़ रही है दिमागी परेशानी
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि चिंता, तनाव और अवसाद की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इन तीनों से प्रत्येक व्यक्ति एक बार जरूर पीड़ित होता है। लंबे समय तक ये स्थिति खतरनाक है। इसकी बड़ी वजह है कि तनाव-चिंता में परिवार और कार्यस्थल में बेहतर सुझाव देने वाले विश्वसनीय लोग कम हैं। इससे मर्ज बढ़ने लगता है। दिमाग में रासायनिक बदलाव आते हैं, कई बार मरीज आत्मघाती कदम उठा लेेते हैं। इसमें सबसे ज्यादा युवा और मध्यम उम्र के लोग हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
– अपनी हॉबी को सक्रिय करें। गीत-संगीत सुने, पेंटिंग करें। खेलें-कूदें।
– मोबाइल, टीवी, लैपटॉप का सीमित उपयोग करें। परेशानी साझा करें।
– पुराने दोस्तों से बात करें। बच्चों और परिवार के साथ स्वस्थ समय बिताएं।
– कार्य स्थल का माहौल बेहतर रखें। योग-ध्यान और व्यायाम की आदत डालें।
– पौष्टिक भोजन करें, धूम्रपान-एल्कोहल से बचें, देर रात तक जागने की आदत बदलें।
– बीमारी को छिपाएं नहीं, साथी उसकी मनोदशा का उपहास न बनाएं, विशेषज्ञ को दिखाएं।
