बसपा सुप्रीमो मायावती ने ईवीएम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद जरूरी है कि मतदाता के मन में इस बात को लेकर कोई संदेह न रहे कि उसका वोट किसी दूसरे प्रत्याशी को चला गया या किसी और के खाते में दर्ज हो गया। ऐसी स्थिति लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था में लोगों के भरोसे के लिए गंभीर होगी।
मायावती ने कहा कि देश में शुरुआती चुनावों के बाद करीब पांच दशक तक मतदान के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ। बाद में चुनाव आयोग ने ईवीएम का इस्तेमाल शुरू कर दिया। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा ने भी ईवीएम का विरोध किया था। उस पर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र में सरकार बनने के बाद भाजपा ने ईवीएम व्यवस्था को खत्म करने के बजाय इस प्रणाली को जारी क्यों रखा?