Agra: Rs 400 Crore Northern Bypass Fails to Keep Heavy Vehicles Out of City, Another Life Lost

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– फोटो : अमर उजाला

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भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार से ताजनगरी की सड़कों पर मासूमों का खून बहना बदस्तूर जारी है। जिम्मेदारों ने आंखों पर गांधारी-सी पट्टी बांध रखी है। बृहस्पतिवार दोपहर 1:30 बजे आगरा-मथुरा हाईवे (एनएच-19) के वाटरवर्क्स फ्लाईओवर पर ट्रक की टक्कर से टूंडला निवासी जीशान (35) की मौत हो गई। 400 करोड़ रुपये की लागत से उत्तरी बाईपास बनने के बाद भी सिस्टम की लापरवाही के कारण भारी वाहन शहर में माैत बनकर दाैड़ रहे हैं।


भारी वाहन चालक बाईपास का उपयोग करने की बजाय सीधे आगरा से शहर की आबादी के बीच होकर धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन, कमिश्नरेट पुलिस, नेशनल हाईवे अथाॅरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) और परिवहन विभाग (आरटीओ) जैसे जिम्मेदार विभागों के अधिकारी इस जानलेवा लापरवाही पर पूरी तरह चुप्पी साधे बैठे हैं।

नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए भारी वाहन आबादी वाले इलाकों के बीच से तेज रफ्तार से गुजर रहे हैं। आरटीओ द्वारा न चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है और न ही पुलिस प्रशासन नियम तोड़ने वाले वाहनों पर लगाम लगा पा रहा है। एनएचएआई ने भी उत्तरी बाईपास बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली लेकिन यह सुनिश्चित करने की जहमत नहीं उठाई कि भारी वाहन बाईपास का ही उपयोग करें। इस साल अब तक हाईवे पर 110 लोगों की माैत हो चुकी है।

ठोस रणनीति के अभाव में जा रहीं जानें

शहरवासियों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे लचर तंत्र के खिलाफ लोगों में गुस्सा बढ़ना शुरू हो गया है। शहर से भारी वाहन गुजरने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता केसी जैन ने कहा कि इस मौत के लिए ट्रक चालक से ज्यादा सिस्टम जिम्मेदार है। अगर सभी जिम्मेदार विभाग ठोस रणनीति बनाते और ट्रक बाईपास से होकर गुजर रहे होते तो ये हादसा नहीं होता। सही योजना न बनने के कारण ये जानें जा रही हैं।

 



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